ऊंची जाति वालो ने रामायण पाठ के दौरान लगाया 10 दिन तक दलितों के घर से निकलने पर प्रतिबंध।

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उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहने वाले दलित कह रहे हैं कि रामायण पाठ सिर्फ एक बहाना है। वे अन्य दिनों में भी हमें मंदिर में प्रवेश नहीं करने देते हैं। वे हमें मंदिर के बाहर से ही पूजा करने को मजबूर करते हैं।

देश के कई हिस्सों में दलितों के मंदिर में प्रवेश से प्रतिबंध को हटा दिया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध का एक मामला सामने आया है। कथित तौर पर राज्य के हमीरपुर जिले के गदहा गांव में दलितों को 10 दिनों तक घर से निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वजह ये बताई जा रही है कि गांव के मंदिर में ऊंची जाति के लोगों द्वारा अखंड रामायण पाठ करवाया जा रहा है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, दलितों ने जब पूजा में शामिल होने की कोशिश की तो उन्हें न सिर्फ धक्का देकर निकाल दिया गया, बल्कि पुजारी ने राम जानकी मंदिर के बाहर एक ‘नोटिस’ चिपका कर उनके प्रवेश पर रोक लगा दिया। कहा गया कि दलित ‘शुद्ध’ नहीं हैं, इसलिए वे मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं। 10 दिनों तक अखंड रामायण पाठ के दौरान उन्हें अपने घरों से भी नहीं निकलना है।

जिला प्रशासन द्वारा दवाब के बाद नोटिस को हटा दिया गया है, लेकिन मंदिर में दलितों के प्रवेश पर अभी भी रोक लगी हुई है। ऊंची जाति के लोग लाठी और डंडे लेकर मंदिर परिसर की सुरक्षा कर रहे हैं ताकि कोई भी दलित पूजा में शामिल नहीं हो पाए। इस घटना के बाद तनाव पैदा हो गया है। जिला प्रशासन ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी।

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मंदिर के पुजारी कुंवर बहादुर सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने हस्ताक्षार से दलितों के मंदिर में प्रवेश न करने का नोटिस लगाया था। वह कहते हैं कि ऐसा करना मजबूरी थी क्योंकि वे अक्सर ‘पी’ कर मंदिर आते हैं। वे कहते हैं, “एक तख्ती पर हमने यह लिखा कि जो कर्म से शुद्ध नहीं हैं और मांस व मदिरा का सेवन करते हैं, वे मंदिर नहीं आ सकते हैं क्योंकि यहां रामायण पाठ चालू है।” सिंह कहते हैं कि जिस जमीन पर मंदिर बनी है, वह उनकी पैतृक संपत्ति है। वह सिर्फ परंपरा का पालन कर रहे है।

गांव में रहने वाले दलित कहते हैं कि रामायण पाठ सिर्फ एक बहाना है। वे अन्य दिनों में भी हमें मंदिर में प्रवेश नहीं करने देते हैं। वे हमें मंदिर के बाहर से ही पूजा करने को मजबूर करते हैं। राजू साहू नाम के दलित कहते हैं, “जब मैंने चल रहे पूजा में शामिल होने की कोशिश की तो मेरी पिटाई की गई। धक्का देकर निकाल दिया गया।” एक अन्य दलित ‘नीलम’ कहती हैं, “गांव में ऊंची जाति के द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में हमें शामिल नहीं होने दिया जाता है।

वहीं, उप-जिला कलेक्टर सुरेश कुमार मिश्रा कहते हैं, “इस मामले में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके उपर कार्रवाई की जाएगी। हमने पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम भेजी है। किसी को भी मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जा सकता है। यह एक अपराध है – साभार जनसत्ता

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