मिलिये सट्रीट लाइट मे आईएएएस परीक्षा की तैयारी करते नदीम उल हसन से

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आई. ए. एस. परीक्षा का प्रतियोगी छात्र नदीम उल हसन.

नदीम रोज सुबह 5 बजे जागते हैं. जागने के बाद लगातार बिना किसी ब्रेक के 5 घंटे पढ़ते हैं. उसके बाद कालेज जाते हैं और वहां से 1 बजे लौटते हैं. लौटने के बाद पुनः शाम 5 बजे तक पढ़ते हैं।

शाम का टाइम ब्रेक टाइम होता है. शाम को वो अपने भाई के साथ डिनर तैयार करते हैं और पुनः स्ट्रीट लाइट में पढ़ने बैठ जाते हैं।

नदीम लंबे समय से इसी रूटीन को फॉलो करते हैं. चाहे गर्मी हो सर्दी हो या बरसात।

नदीम बहराइच के रहने वाले हैं. उनके पिता खेतिहर मजदूर हैं. भाई नोयडा में गन्ने का जूस बेचता है. उनकी पढ़ाई का खर्च भाई ही वहन करता है।

नोयडा में दोनों भाई फुटपाथ के किनारे रहते हैं. ये तस्वीर उसी फुटपाथ पर रात को स्ट्रीट लाइट में पढ़ते हुए ली गयी है।

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नदीम ने बीएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा 65% अंकों के साथ पास किया था. यह 2016 की बात है. अब नदीम ग्रेजुएट हो चुके होंगे. नदीम बताते हैं कि एमएमएच कालेज में उनके सहपाठी उन्हें बिहारी कह कर चिढ़ाते हैं. नदीम उन्हें बताते हैं कि वो बिहारी नहीं हैं बल्कि यूपी से हैं।

नदीम का कोई दोस्त नहीं हैं।

नदीम के पास उनकी किताबें हैं , उनका भाई है , गांव में रहने वाला परिवार है और कभी कभी मदत करने वाले कुछ अजनबी लोग हैं।

नदीम 2018 में क्या करते हैं , कहाँ रहते हैं , मुझे नहीं पता।

जब भी मैं पढ़ लिख नहीं पाता हूँ या बुरा महसूस करता हूँ तो नदीम को याद करता हूँ.

फिर सब ठीक हो जाता है

परदुमन यादव

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