मुख्यमंत्री योगी जी की बात सुनकर मैं गौपालन करना चाहती हूँ, लेकिन बैंक मैनेजर लोन देने के लिए रिश्वत मांग रहा है – सना अली

sana ali amethi
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अमेठी की रहने वाली एक मुस्लिम महिला प्रदेश के मुखिया और पशुप्रेमी योगी आदित्यनाथ की बातों से इतना प्रेरित हुई कि उसने गौपालन करने का फैसला लिया। लेकिन जब उसने इसके लिए बैंक से लोन लेना चाहा तो उससे रिश्वत मांगी गई.

अमेठी जिले थाना कमरौली क्षेत्र के ग्राम बरसंडा की एक महिला ने बैंक आॅफ बड़ोदा शाखा बरसंडा के शाखा प्रबंधक पर कमीशनखोरी का आरोप लगाया है. पीड़िता का आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने उसका ऋण स्वीकृत करने के लिए 10 फीसद हिस्सा मांगा और उसके द्वारा इन्कार किए जाने पर उसका ऋण नही स्वीकृत कर रहे है ।

गौ पालन और दुग्ध व्यवसाय के लिए बैंक से मदद मांगने गई सना –
थाना कमरौली क्षेत्र के ग्राम बरसंडा की निवासी सना अली पत्नी मुशर्रत अली का आरोप है कि उन्होंने गौपालन और दुग्ध डेयरी संचालन हेतु उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड से 10 लाख रुपये के ऋण हेतु पत्रावली बैंक आॅफ बड़ोदा शाखा बरसंडा भिजवाई थी ।

कमीशन सेट नहीं तो कमी बताकर वापस दी फाइल-
पीड़िता का आरोप है पहले तो बैंक मैनेजर ने कहा था कि आपको ऋण मिल जायेगा लेकिन  पत्रावली की सभी औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद शाखा प्रबंधक अभिषेक ने 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की पीडि़ता का आरोप है कि 10 फीसद कमीशन न दे पाने के कारण उसका ऋण स्वीकृत नही हो पा रहा है पीड़िता ने वित्तमंत्री और मुख्यमंत्री से प्रार्थनापत्र भेज कर न्याय दिलाए जाने की मांग की है।

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बैंक प्रबंधन ने आरोपों को सिरे से किया खारिज-
हालांकि बैंक प्रबंधन ने इस मामले में आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है शाखा प्रबंधक बैंक ऑफ़ बड़ोदा शाखा बरसंडा अभिषेक ने बताया कि बैंक द्वारा कराए गए फील्ड विजिट के दौरान कुछ कमियां पाई गई जिसके चलते आवेदक को ऋण नही दिया गया ।

सबसे बड़ा सवाल-
प्रदेश की योगी सरकार जहाँ एक ओर पानी की तरह पैसा बहाकर प्रदेश के किसानो, पशु पालको तथा दुग्ध्य व्यवसाइयों की आर्थिक समृद्धि सहित सूबे को दुग्ध एवं कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए पशुओ के पशु पालन और संरक्षण हेतु गम्भीरता से कदम उठा रही है. वही इसके उलट अति विशिष्ट जनपद अमेठी के कुछ भ्रष्ट बैंक अधिकारी बाकायदा सुविधा शुल्क एवम कमीशन का चश्मा लगाकर मौज मारते हुए योगी सरकार की जन्तु संरक्षण -प्रकृति संरक्षण वाली विचारधारा एव पारदर्शिता को मटियामेट करने में जी जान से जुटे है यही नही स्वरोजगार के लिए दिए जाने वाले ऋण में एक बार फिर बैंकों की साख दांव पर लगी है कमीशन के खेल में कई बार दागदार हो चुका बैंकों का दामन और लोन के मामलों को लेकर अमूमन बैंक अपनी साख पर बट्टा लगवाती आ रही है ।

रिपोर्ट@राम मिश्रा
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