जो बिजली यूपीए में ढाई रुपये यूनिट हुआ करती थी वो अब पांच रुपये तक कैसे पहुँच गई, इस पर कोई सवाल कयो नही करता ?

इस जमाने में आप तार्किक होना बंद कर दीजिए. आप खुद को बुद्धिजीवी मान के इतराना भी, बुद्धिजीवी होना अब कोई गर्व की बात नहीं रही. जैसे सेकुलर होना. ज्यादा पढ़ना भी, खासकर तब जब आप जेएनयू जैसे संस्थान में लम्बी डिग्री लेने का मन बना रहे हों. आप नए एंगल से सोचना भी बंद कर दीजिए. आपकी बुद्धिमत्ता उसी में है कि आप उसी ढर्रे पर सोचे जिस पर बहुसंख्यक (धर्म वाला नही) वर्ग जा रहा हो. भीड़ बनिए. नया रास्ता मत खोजिए. नया रास्ता खोजने पर भीड़ को…