राफेल घोटाले मे अवैध सेक्स का संस्कारी वीडियो भी बना है, वीडियो मे वो दोनो कौन है ?

विदेश से एक बड़ा खुलासा होने वाला है  एक VDO भी आ सकता है.फ्रांस के “Le Monde” अखबार के जूलियन बोसो ने खुलासा कर ही दिया..राफेल पर 20 वी खबर 2007-’10 के बीच अनिल अंबानी को फ्रांस मे €60 मिलयन टैक्स देना था..अंबानी ने केवल €7.6 मिलयन देना चाहा..फ्रांस मना कर दिया.. 2010-’12 के बीच फ्रांस से अतिरिक्त €91 मिलयन टैक्स मांगा..यानी कुल टैक्स €151 मिलयन.. अप्रैल 2015 मे मोदी 36 राफेल खरीदा.. और अक्टूबर 2015 मे अंबानी का €143.7 मिलयन माफ हो गया..€7.3 मिलयन में मान गया फ्रांस!!! फ्रांस…

बीजेपी के घोषणापत्र में सरकारी नौकरियों पर एक शब्द नहीं है, तब भी नहीं जब कांग्रेस ने एक साल मे 24 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया है

ब्रेनवॉश जनता पार्टी का घोषणापत्र-रोज़गार की बात नहीं, राष्ट्रवाद ही राष्ट्रवाद ह बीजेपी के घोषणापत्र में सरकारी नौकरियों पर एक शब्द नहीं है। तब भी नहीं जब कांग्रेस और सपा ने एक साल में एक लाख से पांच लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया है। तब भी ज़िक्र नहीं है जब सरकारी नौकरियों की तैयारी में लगे करोड़ों नौजवानों में से बड़ी संख्या में मोदी को ही पसंद करते होंगे। तब भी ज़िक्र नहीं है कि जब पिछले दो साल में सरकारी भर्तियों को लेकर कई छोटे-बड़े आंदोलन हुए।…

बीजेपी के पोस्टरों को देखकर लगता है कि 2019 के चुनाव ने 2014 से पीछा छुड़ा लिया है। 2019 का चुनाव 2014 को भुलाने का चुनाव है

2019 का चुनाव सपनों का नहीं है, एक दूसरे आंखें चुराने का चुनाव है 2019 के चुनाव ने 2014 से पीछा छुड़ा लिया है। 2019 का चुनाव 2014 को भुलाने का चुनाव है। बीजेपी के प्रचार पोस्टरों को देखकर यही लगता है कि वह 2014 से भाग रही है। 2014 के पोस्टरों पर बीजेपी ने नए पोस्टर लगा दिए हैं। नए मुद्दों की मार्केटिंग हो रही है। इन पोस्टरों पर ज़बरदस्ती टैगलाइन गढ़े गए हैं। उनका भाव स्कूल में फेल होने वाले उस छात्र की तरह है जो घर आकर…

संविधान का सपना एक आर्किटेक्ट के रूप में नेहरू ने बुना, संविधान सभा मे अंबेडकर को जिताकर लाये थे गांधी और नेहरू।

इंसानियत और हिन्दुस्तानियत की संवैधानियत डाॅक्टर बाबा साहब अंबेडकर की संविधान निर्माण को लेकर भूमिका पर बहस मुबाहिसा संविधान समीक्षकों के बीच होता रहता है। यह भी कहा जाता है कि भीमराव अंबेडकर ही मूलतः संविधान के निर्माता हैं। आलोचक इसके उलट यह भी कहते हैं कि अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष होने के नाते अपनी सीमित भूमिका में ही रहे। भारत का संविधान बनने की प्रक्रिया से कहीं आगे बढ़कर उन आनुषंगिक परिस्थितियों को देखने की जरूरत है जिनके मद्देनजर संविधान को बनाने की जरूरत महसूस हुई। द्वितीय विश्वयुद्ध…