जब भी समय मिलता था, लाइब्रेरी में मोटी-मोटी किताबें पढ़ता रहता था – मोदी

  •  
  • 6
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 68 वें जन्मदिन पर एक स्कूल में नन्हें-मुन्नों के बीच पहुंचे तो ‘काका मोदी’ के रूप में नया रिश्ता जोड़ा। संवाद में शिक्षक की भूमिका में प्रधानमंत्री ने बच्चों को कड़ी मेहनत से ही सफलता का मंत्र दिया तो खेल को जरूरी बताते हुए कहा, जो खेलेगा वही खिलेगा। इसी दौरान एक स्टूडेंट ने पीएम मोदी से पूछ लिया कि वह बचपन में कितनी देर तक पढ़ाई करते थे, जिस पर प्रधानमंत्री ने जवाब दिया कि जब भी समय मिलता था, वह पढ़ने बैठ जाते थे।

प्रधानमंत्री काशी प्रवास के पहले दिन सोमवार शाम को वाराणसी शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर नरउर गांव के सरकारी स्कूल पहुंचे तो वहां मौजूद 200 बच्चों ने ‘काका मोदी हैप्पी बर्थडे’ से उनका स्वागत किया। बच्चों ने बिना रोक-टोक अपने मन की बात कही तो प्रधानमंत्री ने भी अपनी बात साझा की। अपनी बात की शुरुआत उन्होंने विश्वकर्मा जयंती की चर्चा से की। उन्होंने रोज तीन-चार बार पसीना बहाने और भगवान विश्वकर्मा के जरिए मेहनत यानी श्रम करने की सलाह दी।

डाउनलोड करें Hindi News APP और रहें हर खबर से अपडेट।

loading...

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपके स्कूल में आया हूं, सभी को शुभकामनाएं। बात को आगे बढ़ाते हुए सीख दी कि सवाल पूछने में कभी डरें नहीं। सवाल पूछने को सीखने की सबसे जरूरी प्रक्रिया बताया। बच्चों से पूछा कि विश्वकर्मा की पूजा क्यों होती है ? बच्चों के सवाल के बाद उन्हें विस्‍तार से बताया कि आज विश्वकर्मा वही है जो औजार, हाथ और दिमाग के साथ पसीना बहाते है। इसी से सपने सृजन होते हैं। कौशल के बिना जीवन अधूरा है।

बातचीत में बच्चों की आत्मविश्वास की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने खेलकूद के जरिए दिन में चार बार पसीना बहाने और लिखने की आदत डालने की सलाह दी। यह भी पूछा कि क्या टीचर पढ़ाती हैं या डांटती है। सवाल पूछने को सीखने और आगे बढ़ने की सीढ़ी बताया। PM ने कहा कि स्कूल में आने के पीछे अपना जन्मदिन मनाना नहीं, बल्कि ‘रीड टू रूम’ के जरिए स्कूलों में बदलाव की तस्वीर को देखना है।

एक बच्चे ने पूछा कि आप कितनी देर पढते थे ?

संवाद के दौरान कक्षा छह में पढ़ने वाले धीरज ने प्रधानमंत्री से बिना हिचके पूछ लिया कि ‘आप बचपन में कितनी देर पढ़ते थे ?’ प्रधानमंत्री ने बताया कि जब भी समय मिलता था, लाइब्रेरी में बैठ मोटी-मोटी किताबें पढ़ता रहता था। कक्षा आठ में पढ़ने वाली शिवानी ने नरेंद्र मोदी को ‘बुद्धु बंदर और चतुर चूहा’ की कहानी सुनाई। छात्रा नेहा कुमारी और रिमझिम ने बताया कि वह पढ़ लिखकर बड़ी अधिकारी बनना चाहती हैं।


  •  
  • 6
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    6
    Shares
  • 6
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Related posts

Leave a Comment