बिना परीक्षा दिलाये ही योगी सरकार ने 16 लोगो को बना दिया सहायक अध्यापक।

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उत्तर प्रदेश मे गजब की योगी सरकार चल रही है उसने बिना परीक्षा के ही 16 लोगो को सहायक अध्यापक बना दिये है।

शुरुआती जांच में जो गड़बड़ी सामने आ रही है वह काफी चौंकाने वाली है. जौनपुर में 16 ऐसे अभ्यर्थी मिले, जिन्होंने परीक्षा ही नहीं दी और चयनित हो गए।

सहायक अध्यापक की परीक्षा की कॉपियों में नंबर की हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने सभी अभ्यर्थियो की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन कराने का ऐलान किया है. जिसके बाद तय है कि धांधली से चयनित सहायक अध्यापकों की नौकरी जायेगी।

जौनपुर में 16 ऐसे अभ्यर्थी मिले हैं, जिन्होंने परीक्षा ही नहीं दी है और उनका सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में चयनित भी हो गए।काउंसिलिंग में जब बीएसए ने अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों को फोन किया तो इसका खुलासा हुआ।

सोमवार को जांच कमेटी के अध्यक्ष संजय आर भूसरेड्डी ने सभी कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन कराने का फैसला लिया. इस फैलसे से धांधली से चयनित अध्यापकों पर तलवार लटकने लगी है, जबकि चयन से वंचित हजारों अभ्यर्थियों को नियुक्ति का मौका मिलेगा.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में खुलने लगी योगी सरकार मे धांधली की पोल

68500 पदों पर सहायक अध्यापक भर्ती का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पहुंचते ही धांधली की पोल खुलने लगी. सोमवार को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक भर्तियों की नियुक्तियां अपने अधीन कर दी. खंडपीठ ने यह आदेश सोनिका देवी की याचिका पर दिया. सोनिका ने अपनी याचिका में उत्तर पुस्तिका बदले जाने का अंदेशा जताया था, जो 31 अगस्त को जांच में सही पाया गया।

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ऐसी गड़बड़ियां आखिर किसके इशारे पर की जा रही है परीक्षा दिया नहीं और हो गए चयनित जांच में जो गड़बड़ी सामने आ रही है वह काफी चौंकाने वाली है. जौनपुर में 16 ऐसे अभ्यर्थी मिले, जिन्होंने परीक्षा ही नहीं दी और चयनित हो गए. काउंसिलिंग में जब बीएसए ने अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों को फोन किया तो इसका खुलासा हुआ. इनमें से दो अभ्यर्थी प्रदेश से बाहर नौकरी कर रहे हैं.

दो और पांच अंक पाने वाले भी बने सहायक अध्यापक

परीक्षा में मात्र दो और पांच अंक पाने वाले भी सहायक अध्यापक बन गए. दो अंक पाने वाले गोरखपुर के अरुण कुमार को देवरिया में नियुक्ति मिली है. 5 अंक पाने वाले महाराजगंज के निजाम हुसैन और 19 अंक पाने वाली बाराबंकी की दीपमाला भी सहायक अध्यापक बन गईं।

पास अभ्यर्थियों के नंबर किए कम

अभ्यर्थी शिखा यादव की उत्तर पुस्तिका में 75 अंक थे, जबकि परिणाम में 22 अंक दिए गए. अभिषेक वर्मा को 67 की जगह 60 अंक दिए गए. एक अभ्यर्थी को 122 की जगह सिर्फ 22 अंक मिले.

जांच के आदेश के बाद जलाई गई थी कॉपियां

गड़बड़ी की बात सामने आने पर सरकार ने 8 सितम्बर को जांच के आदेश दिए गए. इसके बाद इलाहाबाद स्थित परीक्षा नियामक प्राधिकारी दफ्तर में उत्तर पुस्तिकाएं जला दी गईं. अब पीड़ित अभ्यर्थियों ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी दफ्टर का पूरा स्टाफ बदलने की मांग की है. उनका कहना है कि चपरासी, कर्मचारी और अधिकारी वर्षों से गड़बड़ी करते रहे हैं. इसलिए यहां के बड़े अधिकारियों की भी जांच की जाए।

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