अगर तुम भागते तो हम गोली मार देते ऊपर से आर्डर है – उत्तर प्रदेश पुलिस

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लखनऊ में मेरे साथ काम करने वाला लड़का हर्ष आज बता रहा था कि कुछ महीनों पहले वो और उसका दोस्त जब बाइक से कहीं जा रहे थे तो सिग्नल क्रॉस करते करते वो बच गए जिस पर पुलिस ने उन्हें गाड़ी किनारे लगाने का इशारा किया.. उन्होंने पुलिस को बहुत समझाया कि उन्होंने क्रॉस तो नहीं किया फिर भी आप क्यूं चालान कर रहे हैं.. मगर पुलिस वाले माने नहीं.. जिस पर चिढ़ कर हर्ष ने पुलिस से बहस करते हुवे कहा कि “अगर हम लोग भाग जाते तो आप पकड़ भी न पाते.. ये तो शराफ़त थी कि हम चुपचाप गाड़ी ले कर आपके पास आ गए।

जिसके जवाब में पुलिस ने उनसे कहा कि “अगर तुम भागते तो हम गोली मार देते”

इस बात पर हर्ष और उसका दोस्त दोनों बड़ी देर तक बहस करते रहे और पुलिस वाले से कहते रहे कि “ऐसे कैसे गोली मार दोगे आप ? तो पुलिस वाला बोला कि हमें हुक्म है भागोगे तो हम गोली मारेंगे क्यूंकि भागने वाला आतंकी भी हो सकता है।

जब से लखनऊ में विवेक तिवारी को पुलिस वालों ने गोली मारी है मेरा दोस्त हर्ष बहुत घबराया हुआ है और सुबह से चार बार मुझ से कह चुका है कि “आप पोस्ट लिखिए क्यूंकि उस वक़्त तो हमें ये बात सच नहीं लगी थी मगर आज ये ख़बर सुनकर बहुत डर लग गया है कि उस दिन अगर हम भागते तो शायद हमें भी गोली मार दी जाती।

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सिर्फ़ उसके कहने पर मैं ये लिख रहा हूँ क्यूंकि मुझे पता है कि बहुसंख्यकों का ये हाल है अब कि भाजपा के राज में कुछ भी अन्याय हो और उस पर कोई भी कुछ बोल दे या लिख दे तो लिखने और बोलने वाला दोषी माना जाता है।

जब हर्ष ने ये कहा तो मैं सच मे सोच कर दुःख और डर से भर गया कि क्या सचमुच उसके साथ ऐसा हो सकता था? क्योंकि वो ख़ुद ये बताते हुवे बहुत घबराया हुआ था आज.. और वो हम सबको बहुत प्रिय है और हमारे परिवार का हिस्सा है।

तुम्हारे कहने पर मैंने लिख तो दिया है हर्ष मगर एक बात जान लो दोस्त कि ये वो दौर है जहां हम जैसे लोग जिनका नाम “अरबी” में है वो अगर ऐसा कुछ लिख रहे हैं जिसमें किसी सरकारी तंत्र की वजह से दुख और सदमा होता है तो ज़्यादातर बहुसंख्यक इसका मतलब ये निकलता है कि एक “मुसलमान” भीतर से दुःखी है तो अच्छा है.. और यही उनको सुकून से भर देता है कि चलो कोई मर गया कोई बात नहीं मगर ये अरबी नाम वाला तो दुःखी हो गया हमारे देवताओं के राज्य में.. और हम जैसों का दुःखी होना ही अब बहुसंख्यकों को परम सुख प्रदान करता है.. और यही इस राजा की उपलब्धि बन जाती है तुम्हारे समुदाय के लिए.. इसलिए दोस्त तुम्हारी पीड़ा और डर मुझे नहीं लगता है कोई मेरी वाल से समझ पायेगा.. क्यूंकि ज़्यादातर को मेरा ये लिखना या तो 2019 की तैयारी दिखेगी या फिर मेरा दुःखी होना उनके राजा की जीत- ताबिश सिद्दीकी


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