असली चिंता करने वाले चले गये और नकली चिंता वाले ढोंगी पाखंडी रह गए

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असली भगवा धारी चले गये और नकली रह गए, आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर और गंगा के निर्मल प्रवाह के अग्रदूत प्रो. जी डी अग्रवाल का 112 दिनों के अनशन के बाद निधन हो गया है।

मनमोहन सरकार के दौरान 2010 में उनके अनशन के परिणाम स्वरूप गंगा की मुख्य सहयोगी नदी भगीरथी पर बन रहे लोहारी नागपाला, भैरव घाटी और पाला मनेरी बांधों के प्रोजेक्ट रोक दिए गए थे, जिसे मोदी सरकार आने के बाद फिर से शुरू कर दिया. सरकार से इन बांधों के प्रोजेक्ट रोकने और गंगा एक्ट लागू करने की मांग को लेकर प्रोफेसर अग्रवाल 22 जून से अनशन पर थे।

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श्रीविद्यामठ के महंत अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वामी सानंद की मौत को हत्या बताया है. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि जो व्यक्ति आज सुबह तक स्वस्थ अवस्था में रहे और अपने हाथ से ही प्रेस विज्ञप्ति लिखकर जारी करें. वह 111 दिनों तपस्या करते हुए जी डी अग्रवाल ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए कहा था कि मरणोपरांत उनके शरीर को वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दे दिया जाए – गिरीश मालवीय


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