मोबाइल उत्पादन के नाम पर भी मोदी सरकार की झांसेबाज़ी सामने आई, ONGC का ख़ज़ाना ख़ाली, निर्यात भी घटा।

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भारत में हो क्या रहा है, फैक्ट्री की छत डालकर असेंबलिंग हो रही है जिसका कोई लाभ नहीं होता. अगर यही  हिन्दुस्तान टाइम्स के विनीत सचदेव ने एक भांडाफोड़ किया है. सरकार दावा करती है कि मेक इन इंडिया के तहत मोबाइल फोन का आयात कम हो गया है और अब भारत में ही निर्माण होने लगा है. यह झांसा दिया जाने लगा कि मोबाइल फोन भारत में बनने से रोज़गार पैदा हो रहा है. जबकि मोबाइल फोन यहां बन नहीं रहा है. असेंबल हो रहा है. चीन से पार्ट-पुर्ज़ा लाकर जोड़ा जाता है. जहां तरह तरह के पार्ट-पुर्ज़े बनेंगे, रोज़गार वहां पैदा होगा या तुरपई करने वालों के यहां होगा? अगर आप इतना भी नहीं समझ सकते हैं तो आपका कुछ नहीं हो सकता। सवाल है कि जो नहीं हुआ है उसके नाम पर मूर्ख बनाने का यह धंधा कब तक चलेगा।


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