ये मोदी जी को फर्जी एवार्ड कौन थमा गया ? ये पीएमओ वाले कहां बिजी है जो हर बार नाक कटवा देते है

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कल मोदी जी को “सर्व प्रथम” Philip Kotler Presidential Award मिला है। ये अवार्ड वर्ल्ड मार्केटिंग समिट में दिया गया, जिसे स्पांसर किया था संबित पात्रा वाली GAIL, बाबा रामदेव की पतंजलि और भाजपा राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर की RepublicTV ने। यूँ तो ये संस्था सिर्फ मार्केटिंग में अवार्ड देती है, लेकिन इस अवार्ड का नाम संस्था की साईट पे कहीं नहीं है, न ही ज्यूरी का अता-पता है। इधर सरकार ने जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की उसमे देने वाली संस्था का नाम कही मेंशन नहीं है जबकि स्मृति ईरानी से लेकर, प्रकाश जावड़ेकर, राज्यबर्धन सिंह राठौर, रमन सिंह, पियूष गोयल जैसे मिनिस्टरों ने ट्वीट कर के बधाइयों का पुलिंदा बाँध दिया है कल से।

आगे सुनिए, ये अवार्ड जिसके नाम पे दिया गया उसने World Marketing Summit कंपनी सन 2011 में बनायीं और भारत में अपना नाम 3 साल तक प्रयोग करने के लिए अलीगढ की एक छोटी सी कंपनी Suslence Research International Institute Pvt Ltd से अग्रीमेंट कर लिया। मार्केटिंग क्षेत्र में दिए जाने वाले इन अवार्ड्स की निष्पक्षता इस से समझ लीजिये की अवार्ड के लिए अप्लाई करने की फीस एक लाख थी और काफी अवार्ड्स उन्ही कंपनियों को मिले जो स्पोंसर्स थी जैसे WittyFeed

फिलिप कोटलर जिनके नाम पे एक प्रधान मंत्री को अवार्ड मिला, और जगदीश सेठ जिन्होंने ये अवार्ड दिया, दोनों ने ही ज्यूरी में होने का एक ट्वीट तक नहीं किया। अवार्ड कमिटी के सुपर वाइजर प्रमोद पाठक ने बताया की मोदी जी को अवार्ड जैसे मिला बाकी के अवार्ड उस से एक अलग प्रोसेस के तहत दिए जाते है। लेकिन मोदी जी के लिये ना कोई ज्युरी, ना प्रोसेस, ना आधार का पता, बस अवार्ड मिल गया।

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अंत में, इस अवार्ड के केंद्र व्यक्ति तौसीफ ज़िआ से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने कहा की “ये बहुत ही गोपनीय अवार्ड है।

जानकारी के लिये बता दूँ इस प्रकार के अवार्ड के लिए कोई फीस नहीं लगती, दूसरी बात, उस क्षेत्र में व्यक्तियों के उत्कृष्ट कार्यों को देखकर नॉमिनेशन किये जाते हैं। चुनाव के पैरामीटर होते हैं जिन पर परख करने के लिए ज्यूरी का एक पैनल निर्धारित होता है और ये पूरा प्रोसेस एकदम पारदर्शी होता है। यदि पारदर्शी नहीं होगा तो अवार्ड की क्या महत्ता।

मतलब अब जी न्यूज, सुधीर चौधरी, अर्नब गोस्वामी फेल हुए तो “एक्सीडेंटल प्रेम मिनिस्टर” और “उरी” फिल्मों से मार्केटिंग करवाई और जब उनका असर भी नहीं हो रहा तो फ़र्ज़ी अवार्ड खरीदे जा रहे हैं।

मनीष सुसोदिया के शिक्षा, अखिलेश का 1090 महिला हेल्प लाइन का मॉडल विदेशों में अवार्ड पाया, फाइटर प्लेन्स उतारने के लिए अखिलेश के एक्सप्रेसवे की प्रशंशा देश-विदेश में हुयी और एक तरफ ये प्रधान मंत्री हैं जो खुद की पावर से खुद को ही अवार्ड दिला रहे हैं वो भी मार्केटिंग में। धन्य हो अवार्ड प्राप्त प्रधान प्रचार मंत्री जी।

इस कम्पनी की साईट, फोन नम्बर बन्द है, कम्पनी का पता फर्जी है, इंडियाटुडे के पत्रकार ने एड्रेस पर जाके पुष्टि की है।


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