हमने न तो आयकर छूट की सीमा बढ़ाई और न मौजूदा टैक्स में कोई बदलाव किया, ये एक जुमला है।

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बजट पेश करने के बाद पीयूष गोयल ने प्रेस कांफ्रेंस में स्थिति साफ की तो ज्यादातर लोगों की खुशी काफूर हो गई। गोयल ने साफ कहा कि सरकार ने न तो आयकर छूट की सीमा बढ़ाई है और न मौजूदा कर-दरों में कोई बदलाव किया है।

अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल के वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट ने व्यक्तिगत आयकरदाताओं में खूब भ्रम पैदा किया। गोयल ने छोटे व मझले आयकरदाताओं को राहत देने के लिए पांच लाख रुपए तक की सालाना आमदनी वालों को आयकर से मुक्त करने की घोषणा की थी। पर लोगों ने इसे आयकर छूट सीमा बढ़ाना समझ लिया। हर कोई खुश दिखा कि आयकर छूट की ढाई लाख रुपए सालाना की मौजूदा सीमा को दोगुना कर सरकार ने पांच लाख रुपए कर दिया है। इस स्लैब की आमदनी पर आयकर की दर दस फीसद है। यानी लोगों को यह लगा कि पांच लाख या उससे ज्यादा आमदनी वाले हर आयकरदाता को सरकार ने पच्चीस हजार रुपए का सीधा लाभ मिलेगा। लेकिन बजट पेश करने के बाद पीयूष गोयल ने प्रेस कांफ्रेंस में स्थिति साफ की तो ज्यादातर लोगों की खुशी काफूर हो गई। गोयल ने साफ कहा कि सरकार ने न तो आयकर छूट की सीमा बढ़ाई है और न मौजूदा कर-दरों में कोई बदलाव किया है। इसी तरह स्रोत पर आयकर कटौती (टीडीएस) से जुड़ी दो घोषणाओं को लेकर भी ज्यादातर लोग भ्रमित हुए। बजट में वित्त मंत्री ने कहा कि अब बैंक ब्याज की 40 हजार रुपए तक की सालाना आमदनी पर टीडीएस की कटौती नहीं करेंगे। मौजूदा सीमा दस हजार है। इसे भी ज्यादातर लोगों ने ब्याज की आय पर आयकर से छूट मान लिया।

किराए की आमदनी से जुड़ी घोषणा को लेकर भी यही स्थिति दिखी। मंत्री ने किराए की आमदनी पर टीडीएस की कटौती से छूट की मौजूदा सीमा एक लाख 60 हजार रुपए को बढ़ा कर दो लाख 40 हजार रुपए सालाना किया है। पर इसका यह मतलब कतई नहीं है कि किराए की आमदनी पर आयकर से मुक्ति मिल गई। दरअसल टीडीएस की कटौती से करदाता के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो जाता है। बेशक उसकी आमदनी कर योग्य हो या न हो। यानी सरकार ने आयकर से छूट नहीं बल्कि रिफंड लेने के झंझट से करदाताओं को राहत दी है।

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अलबत्ता नौकरीपेशा तबके के लिए अंतरिम बजट में थोड़ी राहत मानक कटौती के रूप में जरूर दी गई है। मानक कटौती को 40 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए सालाना करने का प्रस्ताव किया गया है। पांच लाख रुपए से अधिक कर योग्य आमदनी वालों को पहले की तरह ही आयकर चुकाना होगा। उन्हें कोई राहत नहीं देने के बाबत सवाल पर वित्त मंत्री बोले कि चुनाव बाद जब सरकार पूर्ण बजट लाएगी तो उनके बारे में भी सोचेगी।

संपत्ति से होने वाली आय पर आयकर बचाने के लिए सरकार ने कुछ राहत जरूर दी है। अभी तक ऐसी आय को एक घर खरीदने पर खर्च करने से आयकर छूट मिलती थी। अंतरिम बजट में यह छूट अब दूसरा घर खरीदने की सूरत में भी देने की घोषणा की गई है। हालांकि यह बंदिश भी लगाई गई है कि संपत्ति से आय दो करोड़ रुपए से कम होने पर ही यह लाभ मिलेगा और जीवन में इसका फायदा केवल एक बार ही मिल पाएगा।

पांच लाख रुपए तक की सालाना आमदनी वालों को आयकर के दायरे से बाहर कर देने के फैसले से वित्त मंत्री ने सरकारी खजाने पर 18 हजार 500 करोड़ रुपए सालाना का बोझ पड़ने की बात कही। उन्होंने अनुमान जताया कि इससे तीन करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। इसी तरह मानक कटौती की सीमा बढ़ाने से आयकर दाताओं को 4700 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचेगा।

झंझट से राहत: अब बैंक ब्याज की 40 हजार रुपए तक की सालाना आमदनी पर टीडीएस की कटौती नहीं करेंगे। मौजूदा सीमा दस हजार है। इसे भी ज्यादातर लोगों ने ब्याज की आय पर आयकर से छूट मान लिया। दरअसल टीडीएस की कटौती से करदाता के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो जाता है। बेशक उसकी आमदनी कर योग्य हो या न हो। यानी सरकार ने आयकर से छूट नहीं बल्कि रिफंड लेने के झंझट से करदाताओं को राहत दी है।

साभार एनडीटीवी


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