ये कैसे पीएम है जो दूसरों का मज़ाक उड़ाते उडाते खुद अपना ही मज़ाक बनाते है !

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कल पीएम मोदी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद करते हुए खड़गपुर के छात्रों के एक समूह में शामिल उत्तराखंड की एक छात्रा ने बताया कि वह डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों के लिए प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। छात्रा ने बताया कि यह उन बच्चों के लिए है, जिनकी राइटिंग और लर्निंग स्किल काफी कम होती है। हालांकि उनका क्रिएटिविटी लेवल काफी अच्छा होता है। बता दें कि डिस्लेक्सिया से पीडि़त बच्चों पर आमिर खान स्टारर सुपरहिट फिल्म तारे जमीं पर रिलीज हुई थी।

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इस पर पीएम मोदी ने डिस्लेक्सिया का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘क्या यह 40 से 50 साल के बच्चों के लिए भी काम आएगा।’ अपने ही मजाक पर खुद पीएम मोदी हंसने लगे। जिसके बाद पीएम मोदी सहित सभी छात्र हंसने लगे और छात्रा ने संकोच के साथ कहा, जी सर। फिर पीएम मोदी ने कहा कि फिर तो ऐसे बच्चों की मां बहुत खुश हो जाएगी। दरअसल, पीएम मोदी ईशारों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मजाक उड़ाने की कोशिश की, लेकिन इस गंभीर बीमारी तंज कस खुद मजाक का पात्र बन गए। सोशल मीडिया यूजर्स पीएम मोदी पर निशाना साध रहे हैं।

इसीलिए कहते है देश की जिम्मेदारी पढ़े लिखे खानदानी हाथों में होना चाहिए, वरना जाहिलों की तरह बीमारी का मजाक उड़ाते खुद मजाक का पात्र बनना पड़ता है। जिसके लिए पीएम तंज कस रहे थे वह येल या एंटायर पोलिटिकल साइंस का छात्र नही है खानदानी और Saint Stepehen कॉलेज, दून स्कूल, हावर्ड यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ केम्ब्रिज ट्रिनिटी कॉलेज से एमफिल का डिग्रीधारी है। पायलट भी है । मजाक उड़ाना आसान है बराबरी इस जन्म में मुश्किल है । इलाज की जरूरत मनोरोगियों को है ।


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