पीएम मोदी जिस बीमारी का मजाक उङा रहे थे, उसी बीमारी से वो खुद ही ग्रसित है तभी वो कोचीन को कराची बोल रहे थे !

  •  
  • 88
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

एक कार्यक्रम डिस्लेक्सिया पीडितों की बेबसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीभत्स ठहाके की खबर को गोदी मीडिया ने सिरे से नजरअंदाज कर एक बार फिर अपने बिकाऊ होने का परिचय दिया। सिर्फ टेलीग्राफ ने यह खबर अपने पहले पन्ने पर छापने की हिम्मत दिखाई। सोशल मीडिया पर भी इस वाकये को लेकर प्रधानमंत्री की तरह-तरह से निंदा हुई।जबकि इस बीमारी से वह खुद ही ग्रसित लग रहे है तभी कोचीन को कराची बोल रहे थे।

शिकार बच्चों की रचनाशीलता का जिक्र करते हुए उनके लिए अपने किसी एक प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दे रही थी। प्रधानमंत्री ने उसकी पूरी बात सुने बगैर ही बीच में उसे रोकते हुए पूछा कि क्या यह प्रोजेक्ट 40-50 साल के बच्चे को भी फायदा पहुंचा सकता है? लडकी ने जवाब दिया- हां सर, फायदा पहुंचा सकता है। इस पर प्रधानमंत्री ने क्षुद्रता और वीभत्सता से भरा ठहाका लगाते हुए कहा, फिर तो उसकी मां बहुत खुश होगी।

उस सभागार में 150-200 छात्र थे, जो सभी इंजीनियरिंग पढाई कर रहे हैं, उनमें से किसी को भी प्रधानमंत्री की असंवेदनशीलता और क्षुद्रता पर शर्म नहीं आई। सभी ने हंसने में प्रधानमंत्री का साथ दिया और तालियां भी बजाईं।

डाउनलोड करें Hindi News APP और रहें हर खबर से अपडेट।

loading...

सोशल मीडिया पर मीनू जैन ने लिखा है- ”मुझे चिंता उन विद्यार्थियों को देखकर हुई जो मोदी के उस भद्दे निर्लज्ज मज़ाक पर तालियाँ पीटते हुए हंस-हंसकर लोटपोट हुए जा रहे थे। देश के इन भावी नागरिकों की सन्वेदनशीलता का इस हद तक गिरा हुआ स्तर देखकर यह चिंता स्वाभाविक है कि ये छात्र किस प्रकार के असंवेदनशील समाज का निर्माण करेंगे जबकि उनका रोल मॉडल एक अशिष्ट असंवेदनशील प्रधानमंत्री है। मोदी जैसे क्रूर मानसिकता के व्यक्ति से उम्मीद भी नहीं की जाती है कि वह मनुष्य की किसी मानसिक अक्षमता के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।”

सोशल मीडिया पर ही प्रवीण मल्होत्रा ने प्रधानमंत्री की संवेदनहीनता पर तंज करते हुए सवाल किया कि कोई 70 साल का बच्चा का डिस्लेक्सिया का मरीज हो तो उसकी मां पर क्या गुजरेगी? मल्होत्रा ने लिखा है कि यह जरूरी नहीं है कि देश का प्रधानमंत्री सेंट स्टीफन्स या दून स्कूल और केम्ब्रिज या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षित ही हो लेकिन उसका सभ्य, सुसंस्कृत, धीर-गम्भीर एवं शालीन होना तो निहायत जरूरी है।

इस वाकये को लेकर सोशल मीडिया पर तो प्रधानमंत्री की भरपूर निंदा हुई लेकिन मुख्यधारा के मीडिया ने अपने बिकाऊ होने का परिचय देते हुए इस खबर को पूरी तरह नजरअंदाज किया। सिर्फ टेलीग्राफ ने इस खबर को अपने पहले पन्ने पर जगह दी।


  •  
  • 88
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    88
    Shares
  • 88
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Related posts

Leave a Comment