2014 मे मोदी को 10 हजार करोड़ और जहाज देने वाले उद्योगपतियों ने वसूल लिए 10 लाख करोड़, अब 1 लाख करोङ फिर देने को तैयार

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2014 मे मोदी को 10 हजार करोड़ देने वाले उद्योगपतियों ने वसूल लिए 10 लाख करोड़, अब 1 लाख करोङ फिर देने को तैयार

2014 के लोकसभा चुनाव मे मोदी को 10 हजार करोड़ देने वाले उद्योगपतियों ने उनसे 10 लाख करोड़ वसूल कर लिये, 2019 मे इन्ही उद्योगपतियों ने 1 लाख करोङ देने की बात कही है *मतलब यदि दुबारा नरेन्द्र मोदी पीएम बने तो उनको 100 लाख करोङ कमाई करवायेेेेंगे।

देश में एक तरफ बैंक घोटाले के कारण बैंकों कि सेहत बिगड़ती जा रही है। एक बार फिर बैंकों का एन.पी.ए और ज़्यादा बढ़ गया है। चौथी तिमाही जनवरी से मार्च 2018 में बैंकों के एनपीए 1 लाख 40 हज़ार करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

एनपीए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होता। इस कर्ज़ में 90% से ज़्यादा हीस्सा उद्योगपतियों का है। अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालिया दिखा देते हैं और उनका लोन एनपीए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड की ख़बर के मुताबिक, चौथी तिमाही में 37 बैंकों के एनपीए में 1 लाख 40 हज़ार करोड़ की वृद्धि हो गई है। इसी के साथ बैंकों का सकल एनपीए 9 लाख 80 हज़ार करोड़ हो गया है।

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यह राशि अभी और बढ़ सकती है क्योंकि जम्मू कश्मीर बैंक और ओवरसीज़ बैंक ने चौथी तिमाही के नतीजे घोषित नहीं किए हैं।

गौरतलब है कि लगातार सामने आ रहे बैंक घोटालों के चलते पिछले कुछ महीनों से बैंकों का घाटा बढ़ता जा रहा है। देश के 21 सरकारी बैंकों में से 14 को 2017-18 की चौथी तिमाही जनवरी से मार्च में 42 हज़ार 43 करोड़ का घाटा हुआ है। पंजाब नेशनल बैंक को 13,000 करोड़ रुपये और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को 7000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

सरकारी बैंकों के एनपीए में भी पिछले कुछ सालों में इसी तरह का बढ़ोतरी देखी गई है। रिज़र्व बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में बताया कि 2013-14 में एनपीए 2 लाख 40 हज़ार करोड़ था। और अब ये 9 लाख 80 हज़ार करोड़ हो गया है। देश में लगभग 90% एनपीए सरकारी बैंकों का ही है।

यहा आपको ध्यान देने की बात यह है कि 2014 के चुनाव में देेेश के उद्योगपतियों ने मोदी पर 10 हजार करोड़ लगाए हैं, देशभर में प्रचार के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया है। आशंंका जताईजा रही है कि इस बार भी उद्योगपतियों ने मोदी पर एक लाख करोङ लगानेे की योजना बनााई है।


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