पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में नोटबंदी के बाद 20 फीसदी बढ़ नकदी, मतलब चौकीदार फ्लाप साबित

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नोटबंदी से आतंकवाद और भृष्टाचार की खत्म करने का तथाकथित दावा करने वाले नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में नोटबंदी के बाद 20% नकदी बढ चुकी है।इससे साफ जाहिर होता है कि नरेन्द्र मोदी भारत के पहले और अंतिम विनाशक पीएम साबित हुये।

नोटबंदी से पहले 4 नवंबर, 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में थी, लेकिन अब 19.44 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ ये राशि बढ़कर 21.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. यह दर्शाता है कि वित्तीय प्रणाली में नकदी वापस आ गई है।

नोटबंदी से पहले की तुलना में 15 मार्च 2019 तक प्रचलन में मुद्रा (करेंसी इन सर्कुलेशन) यानि कि नकद राशि 19.44 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 21.41 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी से पहले 4 नवंबर, 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में थी, लेकिन अब 19.44 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ ये राशि बढ़कर 21.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. यह दर्शाता है कि वित्तीय प्रणाली में नकदी वापस आ गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के बावजूद, पिछले एक वर्ष में प्रचलन में मुद्रा (नकद राशि) की तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है. बीते मार्च 2018 में ये राशि 18.29 लाख करोड़ रुपये थी।

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नवंबर 2016 में 500 रुपये और 1,000 रुपये के पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगाने के बाद, जनवरी 2017 में प्रचलन में मुद्रा में लगभग 9 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई थी. हालांकि इसके बाद से ही वित्तीय प्रणाली में नकद राशि लगातार बढ़ रही है, भले ही सरकार और आरबीआई ने कम नकदी (लेस कैश), भुगतान का डिजिटलीकरण और विभिन्न लेनदेन में नकदी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जैसे कई कोशिशें की हों।

आपको बता दें कि पीएम मोदी ने नोटबंदी के पीछे नकद राशि को कम करने, जाली नोटों और काले धन खत्म करने का कारण बताया था. हालांकि आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा समय में नकद राशि नोटबंदी के पहले की स्थिति से भी ज्यादा है।

बैंकरों के अनुसार, आम तौर पर चुनावों से पहले सिस्टम में नकदी बढ़ जाती है. मानसून के बाद मुद्रा की मांग भी बढ़ जाती है क्योंकि रबी सीजन की बुआई के बाद अक्टूबर में कटाई शुरू होती है, इसलिए नकदी की आवश्यकता होती है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि त्योहार के समय भी नकद राशि बढ़ जाती है क्योंकि ऐसे समय पर लोग सोना, ऑटोमोबाइल इत्यादि चीजें खरीदते हैं।

8 नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के नोटों को प्रचलन से हटा लेने के बाद, 2018 के लिए आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया था कि लगभग सभी पैसे बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए थे।

आरबीआई को नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपये के नोटों के कुल 15.310 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए. ये राशि नोटंबदी के समय प्रचलन में रही 15.317 लाख करोड़ रुपये की राशि का 99.3 फीसदी है।

वहीं, एटीएम के माध्यम से नकद लेनदेन भी लगातार बढ़ रहे थे. आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, एटीएम और पीओएस टर्मिनलों के जरिए डेबिट कार्ड का लेनदेन जनवरी 2017 में 200,648 करोड़ रुपये था। वहीं जनवरी 2018 में ये बढ़कर 295,783 करोड़ रुपये और जनवरी 2019 में 316,808 करोड़ रुपये हो गया. 3.16 लाख करोड़ रुपये के डेबिट कार्ड लेनदेन में से, एटीएम के माध्यम से 2.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई।

 


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