बीजेपी नेता येदुरपपा की डायरी ने खोली बीजेपी के भृष्टाचार की पोल, 1800 करोङ की घूस देकर क्लीन चिट ली

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2019 का चुनाव प्रचार अभी शुरू ही हुआ था कि अचानक भाजपा का भृष्टाचार सामने आ गया जिससे अब भाजपा को दुबारा सत्ता में लौटना कठिन हो सकता है। भाजपा का आज खुलासा करने वाली मैगजीन द कारवां ने जो दस्तावेज़ पेश किये है उनसे पता चलता है कि बीजेपी सरकार दुनिया की सबसे बङी भृष्ट सरकार है।

आयकर विभाग भाजपा नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की लिखावट में डायरी प्रविष्टियों की जो प्रतिया कब्जे में है, उससे साबित है कि येदुरपपा ने बीजेपी के तमाम मंत्रियों को 1,800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया  है जिसमे  भाजपा के राष्ट्रीय नेता, केंद्रीय समिति और न्यायाधीश और अधिवक्ता भी शामिल है।

येदियुरप्पा ने कर्नाटक  की 2009 की डायरी में कन्नड़ में अपने हाथों में इन कथित भुगतानों को दर्ज किया। इन प्रविष्टियों की प्रतियां 2017 के बाद से आयकर विभाग के पास हैं। डायरी के पन्नों की प्रतियां बताती हैं कि येदियुरप्पा ने भाजपा केंद्रीय समिति को 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया, उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को 150 करोड़ रुपये का भुगतान किया, उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को 100 करोड़ रुपये दिए; और उन्होंने भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसके अलावा, प्रवेश पत्र, येदियुरप्पा ने “गडकरी के बेटे की शादी के लिए 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया।” डायरी प्रविष्टियों में यह भी कहा गया है कि येदियुरप्पा ने “न्यायाधीशों” को 250 करोड़ रुपये और “अधिवक्ताओं मामलों के लिए 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया, लेकिन किसी भी नाम का उल्लेख नहीं है।

भाजपा नेताओं, न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं को भुगतान के बारे में प्रविष्टियां पंक्तियों के खिलाफ 17 जनवरी 2009 को लिखी गई थीं, जबकि भाजपा केंद्रीय समिति के संबंध में प्रविष्टियां पंक्तियों के खिलाफ 18 जनवरी 2009 को लिखी गई थीं। यह स्पष्ट नहीं है कि इन तिथियों पर प्रविष्टियां बनाई गई थीं या नहीं बाद की तारीख में डायरी में लिखा। येदुयुरप्पा ने मई 2008 से जुलाई 2011 तक कर्नाटक में मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। द कारवां ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किये है प्रत्येक प्रतियों में उनके हस्ताक्षर हैं।

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कारवां या कैरेवन मैगजीन ने जेटली और गडकरी समेत बीजेपी नेताओं और जजों पर 1800 करोड़ की घूसखोरी का इतना बड़ा आरोप लगाया है. सबूत के तौर पर येद्दियुरप्पा की डायरी का वह पन्ना पेश किया है, जो अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास है.

लेकिन इस मैगजीन के खिलाफ मानहानि का मुकदमा नहीं होगा.

जानते हैं क्यों? मानहानि के केस में ट्रूथ यानी सत्य ही डिफेंस है. अगर आपने चोरी की है तो चोर कहने से मानहानि नहीं होती. राजनीतिक हलके में हर कोई जानता है कि येद्दियुरप्पा ने पैसे दिए हैं. वो पैसे देता है.

डायरी का वो पन्ना सत्य है. यही कारवां का डिफेंस है.

मानहानि का मुकदमा करने पर जांच होगी. और ऐसी जांच कौन चाहता है भला?

गिरीश मालवीय लिखते है

येदुरप्पा की डायरी को लेकर जिस तरह से काँग्रेस आज हमलावर हुई वाकई अच्छा लगा उसे ये काम बहुत पहले कर लेना चाहिए था आप माने या न माने लेकिन एक बड़ा लोकप्रिय सिद्धान्त है ‘Any publicity is Good publicity’

आज से 6 महीने पहले आप कहते थे कि ‘चौकीदार चोर है’ तब रॉफेल मुद्दे के साथ यह नारा सही लगता था लेकिन, चुनाव से 1 महीना पहले ये नारा बीजेपी के फेवर में ही जा रहा है इसलिए आज इसी नारे से मोदी ने बाजी पलटने की कोशिश की है ओर वह खुद इस शब्द को इस्तेमाल कर रहे हैं वो जानते हैं कि Any publicity is Good publicity’

आपने जाने अनजाने में एक आम आदमी के दिमाग मे चौकीदार के रूप में मोदी को बैठाने में ही सहयोग दिया है लेकिन उसके बरअक्स आपने अपने किस आदमी को खड़ा किया….किसी को भी नही चौकीदार चोर है या नही यह तो बाद की बात है आपने फिलहाल खुद मोदी को चौकीदार के रूप में स्थापित कर दिया यह तो भला हो सोशल मीडिया का जिसने इस मुद्दे का पानी उतार दिया।

वैसे सच तो यह है कि आप पुलवामा की बात करेंगे, आप एयर स्ट्राइक की बात करेंगे तो यह मुद्दे बूमरेंग की भाँति आप की तरफ ही आ जाएंगे! अंधी भावनाओं के आगे तर्क नही चलते आप सिर्फ मोदी से नही लड़ रहे हैं आप एक बेमिसाल प्रचार तंत्र से लड़ रहे हैं जो इस स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया, यह प्रचार तंत्र नही है यह हॉब्स का लेवियथन ( राक्षस ) है जो भावनाओं के आगे तर्को का गला घोट रहा है, मीडिया का बनाया गया माहौल देखते हुए तो ऐसा लगता है कि सारी कायनात मिलकर मोदी को जिताने में लगी है।

मीडिया का ऐसा इस्तेमाल देखकर तो नर्क से हिटलर का प्रचार मंत्री गोयबल्स भी मोदी मोदी चिल्ला रहा होगा।

सैम पित्रोदा को तो छोड़ ही दीजिए आज अगर गली मोहल्ले का टटपुँजिया कांग्रेस नेता भी पुलवामा हमले या एयर स्ट्राइक पर सवाल उठा दे तो मीडिया उसे कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर का नेता साबित कर देगी।

इसलिए विपक्षी दल को अपनी एक अलग लाइन पकड़नी होगी उन्हें मोदी की पिच पर खेलना बन्द करना होगा नही तो अब इस देश का भगवान ही मालिक है।


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