पीएम नरेन्द्र मोदी की ये कैसी जबर्दस्ती है जो अपने ही नाम से ‘नमो टीवी’ लाँच कर जनता को जबरन दिखा रहे हैं ?

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सूचना प्रसारण मंत्रालय के स्त्रोतों को झुठलाते हुए टाटा स्काई ने माना कि नमो टीवी न्यूज़ चैनल है, विज्ञापन प्लेटफार्म नहीं। यह भी कि आप इसे हटा नहीं सकते।

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प्रधानमंत्री के नाम वाला नमो टीवी सप्ताह भर से प्रसारण कर रहा है. लेकिन इसने प्रसारण लाइसेंस के लिए आवेदन तक नहीं किया है. दि प्रिंट को यह जानकारी उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों से मिली है. लाइसेंस नहीं लेने के अलावा नमो टीवी ने अनिवार्य सुरक्षा अनुमति भी नहीं प्राप्त की है और इस कारण मौजूदा प्रसारण कानूनों के तहत इसका संचालन अवैध है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी की मानें तो भारत के प्रसारण इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब किसी चैनल ने बिना सरकारी अनुमति के या यहां तक कि अनुमति के लिए आवेदन किए बिना प्रसारण शुरू कर दिया हो. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘ऐसे उदाहरण तो रहे हैं जब केबल ऑपरेटरों ने कुछ स्थानों पर बिना अनुमति के पाकिस्तानी या चीनी चैनलों को दिखाना शुरू कर दिया हो, पर ये संभवत: पहली बार है कि कोई भारतीय चैनल, शायद किसी नेता या राजनीतिक दल के स्वामित्व वाला चैनल बिना किसी अनुमति के प्रसारण करने लगा हो.’

चूंकि नमो टीवी ने लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया है, इसलिए इसके स्वामित्व के बारे में या फिर इसकी अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग के लिए इस्तेमाल टेलीपोर्ट या सिस्टम के बारे में ज़्यादा बातें साफ नहीं हैं. ये भी साफ नहीं है कि चैनल समाचार श्रेणी में संचालित है या गैर-समाचार श्रेणी में. इस वर्गीकरण का इस बात से सीधा संबंध होता है कि किसी चैनल को जमानत के रूप में कितनी रकम सरकार के खाते में जमा करानी होगी.

नमो टीवी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 31 मार्च को जारी अधिकृत टीवी चैनलों की सूची में भी शामिल नहीं है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, ‘इस सूची में ऐसे कई चैनल अनुपस्थित हैं जिन्हें या तो लाइसेंस नहीं प्राप्त है या जिनकी लाइसेंस की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. पर इस मामले में तो, अनुमति के लिए आवेदन ही नहीं किया गया है.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों और चुनावी रैलियों को कवर करने वाला नमो टीवी चुनावों की घोषणा के बाद पिछले सप्ताह ऑन-एयर हुआ है. यह सभी प्रमुख डीटीएच प्लेफार्मों पर उपलब्ध है. उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तय नहीं कर पा रहा है कि इस चैनल के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए. कहा जा रहा है कि मंत्रालय डीटीएच प्रसारण कंपनियों को एक अनधिकृत चैनल दिखाने के लिए नोटिस भेजने पर विचार कर रहा है.

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दिप्रिंट ने इस बारे में स्पष्टीकरण के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रवक्ता और सचिव अमित खरे से संपर्क किया, पर रिपोर्ट प्रकाशित किए जाने तक उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई थी. दिप्रिंट ने नमो टीवी संबंधी जानकारी के लिए भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली से भी संपर्क किया. कोहली ने इस रिपोर्टर को पार्टी के सोशल मीडिया प्रमुख अमित मालवीय से बात करने की सलाह दी. मालवीय ने कॉल्स या संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया. उपरोक्त लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

सुरक्षा का उल्लंघन

विभिन्न सूत्रों ने दिप्रिंट से बातचीत में पुष्टि की है कि बिना अनुमति के नमो टीवी का प्रसारण करना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है क्योंकि किसी चैनल को लाइसेंस प्रदान करने की कार्यवाही एक बहुस्तरीय और विश्वसनीय प्रक्रिया है जिसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग समेत कई मंत्रालयों और विभागों की भूमिका होती है.

तय प्रक्रिया के अनुसार, एक टीवी चैनल शुरू करने के लिए चैनल के मालिक को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत करना होता है. आवेदन में चैनल के मालिक और चैनल के स्वामित्व वाली कंपनी के नाम देने होते हैं और चैनल के लोगो (प्रतीक चिन्ह) का भी विवरण प्रस्तुत करना होता है. गृह मंत्रालय से सुरक्षा क्लीयरेंस और अंतरिक्ष विभाग की हरी झंडी मिलने के बाद 10 साल की अवधि के लिए लाइसेंस जारी किया जाता है.

अनुमति मिलने के बाद चैनल दूरसंचार विभाग के वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन विंग के समक्ष संबंधित टेलीपोर्ट की फ्रीक्वेंसी आवंटित किए जाने के लिए आवेदन करता है. समाचार एवं करेंट अफेयर्स चैनल हो या गैर-समाचार चैनल, सिर्फ भारतीय कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंपनी ही प्रसारण की अनुमति के लिए आवेदन करने की पात्र है.

किसी चैनल के लाइसेंस नवीकरण के लिए भी नए सिरे से सुरक्षा क्लीयरेंस की आवश्यकता होती है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सुरक्षा अनुमति की इतनी सख्त प्रक्रिया इसलिए स्थापित की गई है ताकि संदेहास्पद कंपनियों को भारत में प्रसारण की अनुमति नहीं मिल सके. सुरक्षा जांच की प्रक्रिया में लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाली कंपनी और उसके मालिकों की पूरी पृष्ठभूमि खंगाली जाती है.’

वास्तव में वर्तमान सुरक्षा अनुमति प्रक्रिया इतनी जटिल और थकाऊ है कि प्रसारण सेक्टर में काम करना आसान बनाने संबंधी आग्रहों के मद्देनज़र सरकार ने इसे सरल बनाए जाने की सिफारिश की है. अतीत में, राजनीतिक पक्षपात या लाइसेंस देने में रुकावटों के लिए भी मौजूदा सुरक्षा क्लीयरेंस प्रक्रिया की आलोचना की जाती रही है.

चैनल पर चुनाव आयोग की नज़र

बुधवार को इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयोग ने नमो टीवी शुरू किए जाने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट तलब की है. सूत्रों के हवाले से खबर में कहा गया कि आयोग को सरकार की तरफ से ये जवाब दिया जाएगा कि यह एक विज्ञापन प्लेटफार्म मात्र है, न कि एक अधिकृत चैनल. हालांकि, मंत्रालय सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि मौजूदा स्वरूप में भी संचालित किए जाने के लिए चैनल को अनुमति लेनी होगी.

चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है. कांग्रेस ने शिकायत की थी कि नमो टीवी की शुरुआत केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रूल्स, 1994 का उल्लंघन करते हुए की गई है और इसमें जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के कई प्रावधानों का भी उल्लंघन हुआ है, साथ ही यह राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों के पक्ष में सरकारी विज्ञापनों या सरोगेट विज्ञापनों संबंधी चुनाव आयोग के निर्देशों के भी खिलाफ जाता है. प्रसारण सेक्टर के सूत्रों के अनुसार मल्टिपल सिस्टम ऑपरेटर्स (एमएसओ) को अनौपचारिक तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि वे चैनल को प्रमुखता से दिखाएं.

नमो टीवी वर्तमान में टाटा स्काई, एयरटेल डिजिटल टीवी और डिश टीवी जैसे डीटीएच प्लेटफार्मों और केबल कंपनी सिटी नेटवर्क्स पर उपलब्ध है. कई डीटीएच प्लेटफार्मों पर तो इसे समाचार और सिनेमा जैसी कई श्रेणियों में उपलब्ध कराया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई है कि आखिर यह किस श्रेणी में आता है – द प्रिंट


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