पीएम मोदी ने भृष्ट आचरण वाले अफसर सुनील अरोङा को ही क्यो बनाया मुख्य चुनाव आयुक्त !

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एक मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन थे जो ‘राजनीतिज्ञों को नाश्ते के साथ खा जाते’ थे और एक आज के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा है जिन्हें सत्तासीन राजनीतिज्ञ हाजमा हजम की गोली समझ कर गटक लेते हैं

यह अंतर आना स्वाभाविक है टीएन शेषन की रीढ़ की हड्डी बहुत मजबूत थी और आज मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा जिस तरह की पृष्ठभूमि से आये हैं वह पृष्ठभूमि गवाही देती है कि अभी और गिरना बाकी हैं पतन का सिलसिला अभी और चलना बाकि है

सुनील अरोड़ा की जब मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति की गयी थी यह खबर जरूर पढिये

‘तीन राज्यों के चुनाव की गहमा गहमी के बीच मोदीजी ने चुपके से सुनील अरोड़ा की नियुक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर कर दी है और वही 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की जिम्‍मेदारी संभालने वाले हैं

2019 की तैयारी में मोदीजी कोई कोरकसर छोड़ नही रहे हैं उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर ऐसे दागी व्यक्ति की नियुक्ति की है जो नीरा राडिया वाले केस में शामिल रहे हैं, राजस्थान कैडर के आइएएस अधिकारी सुनील अरोड़ा एयर इंडिया के सीएमडी रह चुके है ओर राडिया टेप में सुनील अरोड़ा के साथ हुई बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट के सामने आने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने एविएशन के क्षेत्र में लॉबिंग एक्टिविटी की जाँच करने को कहा था।

पुण्य प्रसुन वाजपेयी अपने 2010 मे लिखे हुए ब्लॉग में लिखते है नीरा राडिया के फोन टैप से इंडियन एयरलाइंस के पूर्व सीएमडी सुनील अरोड़ा के जरिये सीबीआई बीजेपी को भी घेरने की तैयारी में है। क्योंकि एयरलाइंस को लेकर जो भी गफलत सुनील अरोड़ा ने की वह तो राडिया फोन टैपिंग में सामने आया ही है आखिर कैसे सुनील अरोड़ा नीरा राडिया की पहुंच का इस्तेमाल कर एंडियन एयरलाइन्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बनना चाहते थे। लेकिन सीबीआई की नजर सुनील अरोड़ा के जरिये राजस्थान में करोड़ों की जमीन को कुछ खास लोगों को दिलाने में कितनी भूमिका थी, इस पर है। क्योंकि सुनील अरोड़ा राजस्थान में तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सचिव थे। और तब सत्ता बीजेपी के पास थी। और बतौर निजी सचिव बिना सीएम के हरी झंडी के जमीनों को कौडियों के मोल खरीद कर बांटने की कोई सोच भी नही सकता है। उसी दौर में राजस्थान की कई जमीने कुछ खास नौकरशाहों को नीरा राडिया के जरिये मुफ्त या कौडियों के मोल बांटी गयी…यह भी टेलीफोन टैपिंग में सामने आ गय़ी है’

आलोक तोमर बताते हैं नागरिक उड्डयन मंत्री के तौर पर अनंत कुमार से नीरा राडिया की गहरी दोस्ती थी इसी अंतरंगता का सहारा ले कर नीरा राडिया की सिर्फ एक लाख रुपए की लागत से एक पूरी एयर लाइन चलाने का लाइसेंस उन्हें मिलने वाला था उस वक्त सुनील अरोड़ा एएसी के निदेशक थे जो इंडियन एयरलाइंस के प्रबंध निदेशक और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव भी थे

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आलोक तोमर लिखते हैं कि सुनील अरोड़ा ने अनंत कुमार के निर्देश पर राडिया की हास्यास्पद फाइल को रद्दी की टोकरी में डालने की बजाय सिर्फ कुछ मासूम से स्पष्टीकरण मांगे। बाद में अरोड़ा ने कहा कि उदारीकरण का दौर था और ऐसे में प्रतियोगिता होती हैं और कई कंपनियां आती हैं, मगर उनकी पात्रता पर मौजूद नियमों और निर्देशों के हिसाब से विचार किया जाता है

नीरा राडिया ओर सुनील अरोड़ा के रिश्तों पर प्रसिद्ध पत्रकार शांतनु गुहा रे ने भी बहुत कुछ लिखा है जिसे आज पढ़ा जाना चाहिए अपने एक पुराने लेख वो कहते हैं ‘बातचीत के टेप राडिया का संबंध सुनील अरोड़ा से भी साबित करते हैं. अरोड़ा राजस्थान में तैनात आईएएस अफसर हैं जिन्होंने राडिया को अलग-अलग मंत्रालयों में तैनात अपने दोस्तों तक पहुंचाया

इन टेपों में रिकॉर्ड बातचीत उन नोट्स का हिस्सा है जो सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपे हैं. ऐसा लगता है कि नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल पटेल के खिलाफ मोर्चा खोलकर इंडियन एयरलाइंस के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर की अपनी कुर्सी गंवाने वाले अरोड़ा ने राडिया के लिए भारत में कई दरवाजे खोले. यह पता चला है कि इंडियन एयरलाइंस के मुखिया के तौर पर अरोड़ा के कार्यकाल के दौरान सात विमान उन कंपनियों से लीज पर लिए गए थे जिनके एजेंट के तौर पर राडिया की कंपनियां काम कर रही थीं. वरिष्ठ आयकर अधिकारी अक्षत जैन कहते हैं, ‘हमारे पास सबूत हैं कि राडिया की कंपनी ने अरोड़ा के मेरठ स्थित भाई को काफी पैसा दिया है’

राडिया टेप में सुनील अरोड़ा का नाम आने के बाद पहली बार उन्हें अरुण जेटली ने जिम्मेदारी तब दी थी जब 31 अगस्त 2015 को उन्हें सूचना व प्रसारण मंत्रालय सेक्रेटरी बना दिया गया। इसी साल अप्रैल में सुनील अरोड़ा रिटायर हुए लेकिन सुनील अरोरा को अगस्त मोदी सरकार ने प्रसार भारती का सलाहकार नियुक्त कर दिया’ और बाद में चुनाव आयुक्त बनवा दिया गया

सुनील अरोड़ा ने चुनाव आयुक्त रहते हुए रीढ़ की अनुपलब्धता को पहले ही स्पस्ट कर दिया था जब दिल्ली में उसने आप के विधायकों को अयोग्य घोषित करवा दिया था

इस मामले में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने 79 पेज के आदेश में कहा कि विधायकों को अयोग्य घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका तक नहीं दिया गया, ओर न ही उन्हें इस मुद्दे पर दलीलें रखने का पर्याप्त समय मिला

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा जांच कमेटी का हिस्सा नहीं थे। फिर भी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश पर उनके हस्ताक्षर क्यों थे ?

साफ है कि ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति बहुत सोच समझ कर की गयी थी और आज उसका अहसान चुकाने के समय आ गया है – गिरीश मालवीय


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