जो बिजली यूपीए में ढाई रुपये यूनिट हुआ करती थी वो अब पांच रुपये तक कैसे पहुँच गई, इस पर कोई सवाल कयो नही करता ?

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इस जमाने में आप तार्किक होना बंद कर दीजिए. आप खुद को बुद्धिजीवी मान के इतराना भी, बुद्धिजीवी होना अब कोई गर्व की बात नहीं रही. जैसे सेकुलर होना. ज्यादा पढ़ना भी, खासकर तब जब आप जेएनयू जैसे संस्थान में लम्बी डिग्री लेने का मन बना रहे हों. आप नए एंगल से सोचना भी बंद कर दीजिए. आपकी बुद्धिमत्ता उसी में है कि आप उसी ढर्रे पर सोचे जिस पर बहुसंख्यक (धर्म वाला नही) वर्ग जा रहा हो. भीड़ बनिए. नया रास्ता मत खोजिए. नया रास्ता खोजने पर भीड़ को लगेगा ये हमारे रास्ते को चैलेंज कर रहा है. अवधी में एक कहावत है “बप्पा कहिन सरसोइयय लादेव” (पिता जी कह गए थे सारी जिंदगी सरसो ही ढोना. मतलब कुछ आगे बढ़ने की मत सोचना वही करना जो वो कर गए)

अपने खानदान के बड़े बुजुर्गों से बात करना बंद कर दीजिए. खासकर उस मौसा से जो व्हाट्सएप्प पर ऐसे पोस्ट भेज रहा हो जो हद दर्जे का फुद्दू हो. जो २ कौड़ी की टुच्ची सी शायरी को गुलजार की बता के फैमली ग्रुप में भेज रहा हो. उस अंकल से जो ये बता रहा हो कि राहुल गांधी का असली नाम रोल विंची है. जो ये बता रहा हो कि अमिताभ बच्चन इंदिरा गांधी के बेटे हैं. वो अंकल जो बचपन मे आपका रोल मॉडल हुआ करता था क्योंकि वो अंकल सबसे ज्यादा डिग्री धारी थे. और दिखने में हैंडसम. वो जब ये फॉरवर्ड कर रहा हो कि नासा द्वारा ली गई फोटो में दीवाली की रात को इंडिया कैसी दिखती है तब आप स्वतः समझ जाइये की क्यों आपकी जिंदगी इतनी झांटू मिन्टल है. क्योंकि आपने अपना बचपन ऐसे डम्ब आदमी के सरपरस्ती में गुजारा है.

आपका वो कजिन बड़ा भाई जो साल में लाखों टैक्स देता हो, वो जब नेहरू की पिक दिखा के कहता हो कि देखो नेहरू कितना आय्याश था जब आप ये भी नही कह सकते कि ध्यान से देखो बगल वाली एंजलीना जोली है. या ये नही कह सकते कि अरे वो वाली नेहरू की बहन! जवाब में यही आएगा तुम बड़े अक्लदार हो, वो इतना बड़ा बिजनेस कर रहा चूतिया होता तो चलता? आपके पास जवाब नही होगा. क्योंकि आप कुछ नही कर रहे आपके ज्ञान का अचार डाले? वो कमा रहा उसके डम्ब बाते भी फैक्ट और वेदवाक्य से कम नहीं!

बचपन से सिखाया जाता था कि हमेशा बड़े बुजुर्गों के साथ बैठिये अच्छी ज्ञानवर्धक बातें बताएंगे. लेकिन जब भी कभी फैमली गेदरिंग में चार छः बड़े बैठे हो तो आप वहां मत बैठिये. वो आपको बीमार कर देंगे. शारीरिक नहीं मानसिक रूप से. उन्होंने अपनी जिंदगी में पैसों के अलावा कुछ न उखाड़ा है. वो आपको बस पैसे बनाने की मशीन बना सकते हैं. इंसान नहीं. सेंसफुल इंसान तो कतई नहीं. आपका जो ताया छोटे ताए से ये डिस्कसन कर रहा हो कि कैसे एक गाय का गोबर कोहिनूर हीरे से भी ज्यादा कीमती होता है. मोर रोता है तब मोरनी प्रेग्नेंट हो जाती है. ओम कहने से हार्ट अटैक नहीं आता है. कान पर जनेऊ चढा के मूतने से पथरी नहीं होती. तब आप ये भी नहीं कह सकते कि क्या बकवास है ये? वो दो तरह से आपको उठा के पटक देंगे. एक कि तुम कल के लौंडे मुझसे जबान लड़ाते हो. या मुझसे ज्यादा जानते हो. क्योंकि खानदान के प्रत्येक उम्र में बड़े का यही मानना होता है कि उससे उम्र में छोटा वाला उससे कम जानता है. नही जानता है तो भी समाज ये जाने की कम जानता है. भले ही उम्र में बड़ा वाला कितना बड़ा दर चूतिया क्यो न हो. दूसरा वो ये कहकर आपको पटक देंगे कि तुम सुप्रीम कोर्ट के जज से भी ज्यादा ज्ञानी हो गए हो? जो मोर वाली बात का विरोध कर रहे? जो बन्दा डॉक्टर है (पात्रा) उससे भी ज्यादा जानकर हो? जो दिन रात टीवी में आता है. (टीवी में आना छोटी उपलब्धि थोड़े है) तुम आर्ट साइड से पोस्ट ग्रेजुवेशन किये हो और बात काट रहे जज की. यकीन मानिए आपके पास कोई जवाब नहीं होगा. इसलिए दूर रहिये!

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जब ये डिस्कशन चल रही हो कि कल न्यूज़ में दिखा रहे थे कि कैसे भारत ने पाकिस्तान को पेल दिया. भारत का पूरी विश्व में डंका बज गया. बगदादी तो मर गया. एक आदमी तेंदुआ जैसा हो जाता है रात में. तब आप ये भी नहीं कर सकते कि क्या चूतिया न्यूज़ है. जवाब में यही आएगा तुम न्यूज़ चैनल वाले से भी ज्यादा जानते हो? सैकड़ो लोग काम करते हैं दिनरात रिसर्च करते. तब तुम नही बोल सकते कि हमें पता है कि कितना रिसर्च करते. जब वो कहें कि फला पेपर में आया था कि ये हो गया, तब आप ये नही कह सकते कि ट्वीटर पर एक लड़के के फेक ट्वीट को सच मान के पेपर वाले ने इसे छाप दिया था. जब डिस्कशन में राहुल गांधी के आलू सोना पर बात हो रही हो तब आप ये भी नही कह सकते कि वो एडिटेड वीडियो थी राहुल ने नहीं मोदी ने कही थी. कोई नही मानेगा. कितना भी कह लें कि न्यूज़ चैनल आप न्यूज़ चैनल नही दलालों के अड्डा बन गई है तो आपको उल्टा ही मूर्ख बता दिया जाएगा. आप चार दिन ऐसे ही विरोध करते रहे तो आप बदतमीज और आता जाता कुछ नहीं सब बात पर टांग अड़ा देता है. जो बात पेपर में आई हो उसे भी गलत बता देता है. आपके पास कोई जवाब नही होगा।

आप लॉजिकल होना बंद कर दीजिए. क्योंकि जिस देश का अगुआ ही लॉजिकल नहीं मैजिकल है उस देश में लॉजिकल होना निरा मूर्खता है. आप ये कभी ये मत कहिये की जो उज्ज्वला योजना में “फ्री” सिलेंडर दिया गया है वो फ्री नहीं उसी आदमी के जेब के पैसे से घुमा के दिया गया है. साल भर तक सब्सिडी नहीं भेजी जाती है. जब तक सिलेंडर का दाम वसूल नही जाता है. फिर काहे की फ्री ?

आप ये नहीं कह सकते कि जो बिजली यूपीए की सरकार में यूपी के ग्रामीण क्षेत्र में लगभग ढाई रुपये यूनिट हुआ करती थी वो अब पांच रुपये तक कैसे पहुँच गई? जो बिजली कनेक्शन फ्री में देने और घर घर बिजली का ढ़िढोरा पीटा जा है वो कनेक्शन का पैसा बिजली बिल में एड करके इंडारेक्टली वसूला जा रहा है फिर कैसे फ्री कनेक्शन? यकीन करिए जवाब यही सुनने को आएगा कि दिया तो. आप ये भी नही कह सकते कि ऐसी कीमत पर देना भी कैसा देना?

आप सवाल करना बन्द कर दीजिए. सादे पन्ने पर लिखकर दे सकता हूँ कि आप सबसे सुखी आदमी बन जाएंगे और सबसे अच्छे भी. आप सन्तुष्ट होना सीख लें आप सबसे बेहतर नागरिक बन जाएंगे. आप हमले में मरे शहीदों पर बोलना बन्द कर दीजिए आप अच्छे नागरिक होंगे. आप ये सवाल करना बंद कर दीजिए कि सर्जिकल स्ट्राइक में मरे 250 आतंकी में से बिना फोटोशॉप के 25 के फोटो दिखा दीजिये आप इस बात से संतुष्ट होना शुरू कर दीजिए कि 10-12 सागवन के पेड़ गिरा दिए ये क्या कम था? आप अच्छे नागरिक बन जाएंगे

आप रोजगार का, बेरोजगारी का, किसानों की मौतों का, डिग्री का, सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी को आए गुमनाम चंदे का डेटा मांगना बन्द कर दीजिए आप अच्छे नागरिक कहलाएंगे. आप इस बात से खुश रहना सीखिए की हम पाकिस्तान से तो बेहतर है ही, इस बात पर ज्यादा टेंशन न लीजिए विश्व की एक जानी मानी सर्वे कंपनी ये क्यों कह रही है कि 2025 तक बंगलादेश की GDP इंडिया से आगे निकल जाएगी. इस बात की टेंसन मत पालिए की औरतों पर शोषण होने के मामले भारत अव्वल देशों में हैं. इस बात की भी नहीं कि पूरा वेस्ट हम पर हँस रहा है कि कैसा चूतिया देश है और कैसे चूतिये लोग जो एक जानवर के नाम पर अपने ही देश के लोगों को पीटपीट कर मार डालते हैं. कभी ये मत सवाल कीजियेगा कि वो जानवर जिसे हम माँ कहते हैं वो इंसानी मल खाने में सुवर और कुत्ते के बाद तीसरे नम्बर पर आती हैं. जो लोग गांव के हैं. बचपन मे गाय चराए हैं वो ये बात बहुत अच्छे से जानते होंगे, लेकिन ये सब बातें मत कहिए!

इस बात की टेंशन मत कीजिए कि जिस करप्शन के दम पर चौदह में उसने सत्तर सालो की करप्ट सरकार पलट दी थी, बदले में मिली सरकार में भ्रष्टाचार घूसखोरी और ही बढ़ गया. बस तरीके बदल गए. यहां तक कि वो सरकार अपनी ही पार्टी के आए चंदे का डेटा नही बताती है। कुल मिलाकर आप चुप रहिये – आशीष वत्स


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