साध्वी हिरासत में उत्पीड़न की जितनी भी कहानियां सुना रही हैं, सब फर्जी हैं – मानवाधिकार आयोग

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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की अनैतिकता पर गौर कीजिए। अदालत ने उन्हें स्वास्थ्य खराब होने के कारण जमानत दी है। मुंबई हाईकोर्ट में दायर उनकी जमानत याचिका में कहा गया था कि वह इतनी बीमार हैं कि किसी दूसरे इंसान के सहारे के बिना चल भी नहीं सकतीं। लेकिन सच क्या है ? यह कि साध्वी चुनाव लड़ रही हैं।

यानी अदालत को गुमराह किया गया। इधर समाज को भी गुमराह किया जा रहा है।

साध्वी हिरासत में उत्पीड़न की जितनी भी कहानियां सुना रही हैं, सब फर्जी हैं। वह समाज को गुमराह करने के लिए गढ़ी गई हैं।

साध्वी की गिरफ्तारी एक ऐसा मसला थी, जिस पर पूरे देश की नजर थी। इसलिए पुलिस जो करती है, वह इस मामले में नहीं कर पाई। पुलिस कुछ मामलों में यह करती है कि आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसे अवैध हिरासत में रखती है।

दरअसल, नियम यह है कि जांच एजेंसियों को किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 24 घंटे के अंदर उसे कोर्ट में पेश करना ही पड़ता है। इस नियम से बचने के लिए पुलिस यह करती है कि कुछ गिरफ्तारियों को वह तब तक नहीं दिखाती, जब तक कि पूछताछ पूरी न हो जाए। पूछताछ पूरी करने के बाद पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी दिखाती है और उसके ठीक 24 घंटे के अंदर उसे अदालत में पेश कर देती है।

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गिरफ्तारी होने और गिरफ्तारी दिखाने के बीच की अवधि को अवैध हिरासत कहा जाता है। आरोपी की पिटाई आदि इसी अवधि में होती है। चूंकि प्रज्ञा ठाकुर का मामला हाई प्रोफाइल था, इसलिए पुलिस की अवैध हिरासत में वह नहीं रहीं।

प्रज्ञा न्यायालय के आदेश पर पुलिस की हिरासत में रही थीं। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद अगर पुलिस उसे अपनी हिरासत में लेती है, तो उसे छू भी नहीं पाती, क्योंकि उसका 24 घंटे में एक बार चिकित्सकीय परीक्षण होता है। पुलिस हिरासत में आरोपी से उसका वकील भी मिल सकता है।

मुंबई पुलिस की एटीएस की हिरासत में प्रज्ञा का निरंतर चिकित्सकीय परीक्षण होता रहा। उनके वकील भी उनसे मिलती रहे। अगर हिरासत में प्रज्ञा को प्रताड़ित किया गया होता तो देशभर में तहलका मच जाता। यानी, प्रज्ञा ने पुलिस उत्पीड़न की जो कहानियां सुनाई हैं, वह मनगढ़ंत हैं। वह समाज को गुमराह करने के लिए सुनाई गई हैं। यह झूठ लोगों के वोट हड़पने के लिए बोला जा रहा है।

एक तरफ समाज को गुमराह करके वोट हड़पने की कोशिश की जा रही है, तो दूसरी तरफ अदालत को गुमराह करके जमानत हासिल कर ली गई है। यह अनैतिकता उस महिला द्वारा की गई है, जो स्वयं को साध्वी कहती है। घोर कलयुग आ गया है।

राजेंद्र चतुर्वेदी


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