दूसरो के घर तोडकर अपना घर बसाने वाली बीजेपी की ये तीन औरते संसद कयो जाना चाहती है ?

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मिलिये भाजपा की तीन ऐसी खूबसूरत हसीनाओं से जिन्होंने पूरे मुल्क की औरतों को हक़ दिलाने का परचम बुलंद कर रखा है और औरत जात की खिदमत में दिन-रात एक कर रहीं है।

यूँ तो हमें किसी की जाती जिंदगी में ना तो झाँकने का हक बनता है ना ही उसपर कोई तंज़ या तनक़ीद करने का, मगर ये ख़ातूनें सियासत के बड़े चेहरे हैं इसलिए इनकी जाती-जिंदगी के अहम पहलू उस अवाम को भी जानने का हक़ है जो इनका चेहरा देखकर और सियासी ड्रामेबाजी से मुतास्सिर होकर इन्हें अपना रहनुमा चुनती है और बेतहाशा उम्मीदें पाल बैठते हैं।

शुरुआत करते है लगातार दो लोकसभा चुनाव हारकर भी मौजूदा सरकार में एच.आर.डी. मिनिस्टर जैसा कद्दावर ओहदा हासिल करनेवाली स्मृति मल्होत्रा उर्फ श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी से..इनकी जिंदगी यूँ तो खुली किताब है जो तकरीबन हर किसी ने पढ़ी होगी.. ग्लैमर वर्ल्ड में एंट्री करने से पहले इनकी जिंदगी काफी मशक्कत भरी रही. बेरोजगारी के आलम में इन्हें बार-अटेंडर की नौकरी भी करनी पड़ी, इनका नसीब अच्छा था कि एक मशहूर और रईस कारोबारी की बीवी मोना से इनके दोस्ताना ताल्लुक थे जिसने बुरे वक्त में इन्हें काफी सहारा दिया, इन्हें टीवी इंडस्ट्री में अपनी पहचान के जरिये काम दिलाया, अपने घर मे रहने को जगह और खाने को खाना दिया।

ये इंसानी फितरत है कि जब किसी कमज़र्फ को थोड़ा मिलता है तो उसके अंदर बहुत सारा पाने का लालच जाग उठता है, इस लालच से स्मृति जी भी अछूती नहीं रह पाईं और उन्होंने अपनी उसी मददगार दोस्त के अमीर शौहर पर डोरे डालना शुरू कर दिए जो एक बच्ची का बाप भी था। खूबसूरत स्मृति जी के हुश्न का जाल जुबिन ईरानी जैसे पंछी को फांसने के लिए काफी था, नतीजा ये निकला कि जिस मोना ईरानी ने आसरा दिया था वो घर से बे’आसरा होकर बाहर हो गई और मेहमान बनकर आसरा लेनेवाली उस घर की मालकिन बन गई।

लब्बोलुआब ये कि एक बच्ची से उसका पिता और एक पत्नी से उसका पति छीनने वाली आज देश की एक सो कॉल्ड आईडियल लीडर हैं और महिला-सम्मान के लिए लड़ रहीं है।

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दूसरे नंबर पर आतीं हैं भारतीय सिनेमा की सुपर-सितारा “ड्रीमगर्ल” हेमामालिनी जी.. सत्तर के दशक में ये भारतीय नौजवानों की ही नहीं बल्कि सिनेजगत के हर सुपरस्टार के दिलों की धड़कन हुआ करतीं थी, जिनके एकतरफा आशिकों में जितेंद्र और संजीव कुमार जैसे दिग्गज नाम भी थे मगर मोहतरमा का दिल आया भी तो चार बच्चों के बाप धर्मेंद्र सिंह देओल पर। दिक्कत ये थी कि धर्मेंद्र अपनी पत्नी को छोड़ना नहीं चाहते थे और आशिकी का आलम ये था कि स्वप्न-सुंदरी से दूर भी नहीं रह सकते थे.. हिन्दू धर्म में बिना पहली पत्नी को तलाक दिए दूसरी शादी होना संभव नहीं था इसलिए सबसे आसान तरीका मुसलमान बनकर शादी करने का रहा.. फिर क्या था पर्दे की बसंती सरकारी दस्तावेजों पर आएशा बेग़म और ही-मैन वीरू दिलावर खान बन गए.. इस तरह हेमा जी ने एक पत्नी से उसका पति और चार बच्चों से उसका बाप छीन लिया। अब फिलहाल मथुरा की महिलाओं के साथ गेँहू काटकर उन्हें समानता का अधिकार और न्याय दिला रहीं हैं।

तीसरे नंबर पर आतीं है अस्सी के दशक की बेहतरीन अदाकारा जयाप्रदा जी, जो आजकल आज़म खान के बयानों की विक्टिम बनकर और रो-धोकर एक बार फिर सांसद बनने के जुगाड़ में है, हालाँकि गेंहू काटने की एक्टिंग ये भी परफेक्ट करती हैं। इनकी स्टोरी जरा लीक से हटकर है.. कहने को तो ये मशहूर निर्माता श्रीकांत नाहटा की पत्नी हैं मगर पत्नी कैसे हैं ये बता पाना मुझ जैसे अज्ञानी के लिए संभव नहीं क्योंकि श्रीकांत नाहटा ने अपनी पत्नी से तलाक नहीं लिया।

जयाप्रदा जी से कथित शादी के बाद भी श्रीकांत नाहटा अपनी पहली पत्नी के साथ भी रहते है और उनसे 3 बच्चे भी है, यानी जयाजी का रिश्ता खुद आधा-अधूरा सा है जो ना किसी औरत के साथ इंसाफ कर सकीं ना खुद पूरा हक पा सकीं।

एक किलोमीटर लंबे लेख का सार बस इतना सा है कि एक देवीजी के पति 1 बच्ची के बाप थे, दूसरी के पति 2 बेटों और 2 बेटियों के बाप थे तथा तीसरी के पति 3 बच्चों के बाप हैं… और सब की पत्नियाँ भी जिंदा थी जिनका विवाहित जीवन बड़े मजे से चल रहा था।

मासूम बच्चों से उनके बाप और मोना ईरानी, प्रकाश कौर तथा चंद्रा नाहटा से उनके पति छीनकर घर तोड़नेवाली औरतें अगर औरत के हक़ की बात करतीं हैं तो ये सिर्फ एक मजाक ही लगता है.. मगर क्या करें हमारे मुल्क की अवाम भी भरपूर मज़ाक झेलने के मूड में है इसलिए तो ऐसे जोकर चुनती है जो मुस्लिम औरतों को हक़ दिलाने की बात करते हैं और खुद की पत्नी बिना तलाक दिए छोड़कर भाग जाते हैं।

आगाज़ सिद्दीकी


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