कांग्रेस / राहुल बेटों के लिए टिकट मांगने पर वरिष्ठों से नाराज, 10 दिन में हार की जवाबदेही तय होगी

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नई दिल्ली. राहुल गांधी ने रविवार को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का प्रस्ताव वापस ले लिया। न्यूज एजेंसी आईएएनएस को सूत्र ने बताया कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में राहुल ने कुछ वरिष्ठ नेताओं के बर्ताव पर भी नाराजगी जताई। राहुल ने बैठक में साफ कहा कि कुछ वरिष्ठ अपने बेटों को टिकट दिए जाने के लिए अड़ गए। उन्होंने पार्टी से पहले अपने बेटों के हितों के बारे मेें सोचा। पार्टी ने फैसला लिया है कि लोकसभा चुनावों में मिली हार की वजहों को तलाशा जाएगा और अगले 10 दिन के भीतर जवाबदेही तय कर एक्शन लिया जाएगा। इसका असर कई महासचिवों और राज्य में पार्टी प्रमुखों पर पड़ सकता है।

राहुल ने शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दौरान यह प्रस्ताव रखा था। लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल ने सीडब्ल्यूसी की बैठक में कहा था कि मैं पार्टी का अध्यक्ष हूं और जिम्मेदारी लेते हुए मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, कार्यसमिति ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

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राहुल ने कहा- बेटों के लिए नेताओं ने पार्टी हित को दरकिनार किया
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राहुल ने बैठक में कहा कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अपने बेटों को टिकट दिए जाने के लिए अड़े थे। राहुल गांधी इससे सहमत नहीं थे। उन्हें लगता था कि चुनाव लड़ने की जगह ये लोग चुनावी अभियान में बड़ा रोल अदा करना चाहिए। राहुल ने कहा कि इन वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी हित की बजाय अपने बेटों के हित में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने कहा कि गहलोत ने एक हफ्ते तक बेटे के लिए जोधपुर में चुनावी अभियान किया और पार्टी के दूसरे कामों को नजरंदाज कर दिया।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने बेटों को टिकट देने को कहा था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भी अपने बेटे कार्ति को शिवगंगा से टिकट दिए जाने को कहा था। कमलनाथ के बेटे नकुल को छिंदवाड़ा और कार्ति को शिवगंगा सीट पर जीत मिली है। गहलोत के बेटे वैभव को जोधपुर सीट पर हार मिली।

गैर-गांधी को अध्यक्ष चुनने को कहा था- रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल ने इस बैठक में कहा था कि पार्टी गांधी परिवार से इतर किसी व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर चुने। सीडब्ल्यूसी ने राहुल की यह पेशकश नामंजूर कर कहा कि पार्टी को आपके मार्गदर्शन और नेतृत्व की जरूरत है। बैठक में कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से हस्तक्षेप करने और राहुल गांधी को समझाने के लिए कहा था। इस पर सोनिया ने कहा कि यह राहुल का फैसला है कि उन्हें पद पर रहना है या नहीं।


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