सुधा भारद्वाज अगर किसी दूसरे देश में होती तो आज उन्हें कई अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके होते।

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कया हम मर चुके लोग हैं ? हमारा शरीर पूरी तरह से मर चुका है ,सड़ चुकी है,अब तो बदबू भी आ रही है । हमें जल्दी से जल्दी अपने -अपने मृत शरीरों को लेकर खुद गंगा में विसर्जन कर आना चाहिए। क्या यहाँ दिन भर सोशल मीडिया में रहने वाले विद्वान पुरुष ,विदुषी महिलाएं यह जानती है कि आज कथित तौर पर माओवाद के समर्थन में गिरफ्तार होने वाले लोग कौन हैं ?

क्या आपने जानने की कोशिश किया है ? क्या सर्च इंजन गूगल पर आपने इन्हें ढूढ़ा ? नहीं न ! लेकिन प्रियंका चोपड़ा के लवर निक जोनास कौन हैं आपको पता है, उनके कितनी प्रेमिकाएं पूर्व में और थीं आपको पता है। आपको तो ये तक पता है कि दीपिका पादुकोण की शादी कब होने वाली है और किससे।

दरअसल देश की मीडिया ने आपको आपके लायक जानकारी दी है। मीडिया अच्छे से जानती है आपका टेस्ट क्या है। इसलिए अगर प्रियंका चोपड़ा से या शाहरुख़ खान से कानूनन विदेशी एयरपोर्ट पर तलाशी ले ली गई तो आप यहाँ सोशल मीडिया में कोहराम मचा देंगे।

लेकिन देश में आपके पड़ोस में ही रहने वाली कोई सुधा भारद्वाज जैसे महिला अगर गिरफ्तार होती है तो आपको फर्क नहीं पड़ता। आप अपनी पुलिस और सरकार पर आँख मूंदकर भरोसा करते हैं। आप उनके बारे में जानना भी नहीं चाहेंगी क्योंकि उनमें वह ग्लैमर नहीं है जो आपको अट्रेक्ट करता है। यह देश सिस्टम के विरुद्ध लड़ने वाले लोगों को देशद्रोही समझता है और देश ही क्यों यहाँ के लोग भी अपने भीड़ में से ही कोई अगर गलत के खिलाफ मुँह खोलता है तो उसे पागल समझता है।

सुधा भारद्वाज जैसी महिला अगर किसी दूसरे देश में होती तो आज उन्हें कई अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुका होता। असाधारण स्त्री जिनका 24 घंटा सिर्फ और सिर्फ दूसरे लोगों के लिए कार्य करने में कट जाता है। बस्तर के सैकड़ों लोगों के लिए न्याय की एक उम्मीद थी यह महिला। दफ्तर में युवा वकीलों की फ़ौज जिनका काम भी सिर्फ और सिर्फ गरीब लोगों के लिए जिनमें ज्यादातर आदिवासी हैं का केस लड़ना। न खुद की जिंदगी की परवाह की और न अपने बच्चों को सही तरह से परवरिश कर पाई। अपनी पूरी जिंदगी होम कर दी सिर्फ उन आदिवासियों के लिए जिन्हें माओवादी बता मार दिया जाता है।

सुधा सिर्फ बेकसूर आदिवासियों के लिए लड़ी और लड़ रही है। बस्तर में सैकड़ों फर्जी एनकाउंटर हुए ,आज तक एक भी आयोग ने रिपोर्ट नहीं दिया है। न जाने कितनी आदिवासी बहनें नोच के मार डाले गए ,उनके लिए लड़ रही है है सुधा। आज आप देश की किसी बहन का गिद्धों द्वारा नोचते वीडियो देख उसे वायरल करते हैं कि जल्दी से जल्दी अपराधी गिरफ्त में आये। लेकिन जिनका वीडियो नहीं बना और नोच के उन्हें मार डाला गया क्या उनके अपराधी गिरफ्त में नहीं आना चाहिए। इसलिए सुधा जैसे महिलाओं के लिए लड़िये, उन्हें इस नाजी सरकार से बचाइए ।

सुधा जैसे लोग सच्चे वीरांगना हैं इन्हें पहचानिये। आपके हीरो कोई आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा , दीपिका पादुकोण या सनी लियोन  जैसे लोग नहीं है।

विक्रम सिंह चौहान

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