कल जो अडवाणी थे आज मोदी को बनाया गया और आज जो अडवानी है कल बहुत ही जल्दी मोदी होने वाले हैं।

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मै 38 साल संघ में रहा हूँ और ओ टी सी भी किया हूँ। मै कक्षा 4 से ही संघ मे गिरफ्तार हो गया और अटल जी तक रहा। वैसे 1988 से ही मोह भंग हो गया था लेकिन कुछ ब्यक्तिगत संबंधों के कारण लोगों जैसे गोविंद जी. विनय कटियार,और बाल जी जैसे , लोगों के कारण जुड़ा रहा। लेकिन जैसे जैसे गांधी नेहरु, मार्क्स, लेनिन और चेगुवारा जैसे लोंगो को पढ़ता गया और संघ के अंदरूनी लोंगो को समझता गया तो दूरी बनती गयी।

आज यूपी के जितने मंत्री है सरकार में सब हमे अच्छी तरह जानते है। खैर संघ है क्या। और इसकी बिचारधारा क्या है ? इसका लक्ष्य क्या है ? 80% संघी नही जानते है। वैसे कोई भी संघ का स्वयंसेवक कभी भी गालीगलौज नही करता। ये उसकी सबसे बड़ी अच्छी मेरिट है और हाँ वह तर्क भी नही करता। संघ के खिलाफ सुनता नही और जहाँ संघ के खिलाफत की जगह हो वह वहाँ नही रूकता। अतः 100% गारंटी है कि फेसबुक पर जितने भक्त हैं वे मोदी भक्त हैं निहायत बदतमीज मोदी की तरह और वे विना किसी आधार या तर्क के पं नेहरु और मुसलमानों का बिरोध करते है। जब आप तर्क करेंगे तो वे वहाँ से हट जायेंगे।

वहाँ किसी प्रतिभावान को आगे नहीं रखा जाता। जनसंघ से लेकर बीजेपी मे आजतक कोई प्रतिभावान ब्यक्ति आगे नहीं जाता , जो थोडा भी प्रतिभावान होता है उसका हश्र बलराज मधोक, दीनदयाल उपाध्याय  और लालकृष्ण अडवानी का होता है। हिन्दुत्व की खोज तो वीर सावरकर की है लेकिन उसके असली आइडियोलाग गोलवलकर थे।

संघ पहले महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मणों का एक गिरोह था। पहले इसका नाम अंग्रेजों के जमाने मे रायल सीक्रेट सर्विस था। और अंग्रेजो के दलाली के लिये ही यह बना था। आजादी के लड़ाई मे एक तरफ अंग्रेजों की दलाली भी करते थे और दूसरी तरफ मुसोलिनी और हिटलर से भी संबंध रखते थे। इनके बिचार मुसोलिनी और हिटलर के बिचार है । इनका आकलन था कि सेकेंड विश्व युद्ध मे हिटलर जीत जायेगा। और.उसके समर्थन से भारत पर कब्जा कर लेंगे। लेकिन हुआ उल्टा।

इनका लक्ष्य तथाकथित हिंदू राज्य है जहाँ जर्मन रेस के हिटलर की तरह चितपावन रेस के ब्राह्मणों का इस देश पर राज हो और मनुवादी संविधान जिसमे ब्राह्मण सुप्रीम और सब उनके अंडर रहें। दलित और औरते खासकर गुलाम हो। दलित सबकी सेवा करे और औरते सिर्फ बच्चा पैदा करें। खैर गांधी नेहरु ने इनके सपने को चूर चूर कर दिया। लेकिन सदियों से चली आ रही शोषणकारी ब्यवस्था जो असमानता के उपर बनी है इनके लिये खाद पानी का काम कर रही है। ये किसी को समर्थन दे सकते है और ले सकते हैं वशर्ते वह इनके हिन्दू राज मे बाधा न हो।

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इन्होंने माफी मांगकर पटेल को समर्थन दिया, आपातकाल मे इंदिरा गांधी का समर्थन किया। 1980 मे अटल के गांधीवाद समाज वाद के खिलाफ इंदिरा जी को समर्थन किया और 1984 में इंदिराजी के वाद राजीव का भी समर्थन किया।

1975 से तो मै साथ ही हूँ। बनारस मे राजनरायन को हराने के लिये कमलापति त्रिपाठी को जिताने के लिये प्रत्याशी भरत सिंह राजपूत को बदलकर ओम प्रकाश सिंह कुर्मी को लाये। जिससे कुर्मी वोट राजनरायन को न मिले। और 20000 वोट से राजनरायन हरा दिये गये। मेरा मतलब है कि ये दिल्ली मे उसीको मदद करते है जो इनके एजेंडे मे बाधा नही होता। राजीव ने अयोध्या मे ताला खोला। पटेल के जमाने मे पंत ने अयोध्या मे 22 दिसंबर 1949 के रात को बाबरी मस्जिद मे रामलला की मूर्ति रखवायी। नेहरू को अंधेरे मे रखकर। नेहरू ने यहाँ तक कहा कि जिस यू पी कांगँरेस मे मै 35 साल इन लोगों के साथ काम किया आज वो मेरे लिये फारेन लैंड हो गयी है।

पंत ने दिग्विजय नाथ से मिलकर आचार्य नरेंद्र देव को हराया। मतलब संघ का रिश्ता नेहरू को छोड़ कांग्रेस से सदैव रहा। नेहरु इनको जानते थे और औकात मे रखते थे। इनको क्या चाहिये ? बिकास। बिकास इनका एजेंडा कभी नही था और न है। मंदिर , 370 और कामन सिविल कोड। इन तीनो का मोदी ने कभी नाम नही लिया। अयोध्या जाना तो दूर उसकी चर्चा भी नही किया।

370 के समर्थन से काश्मीर मे सरकार बना लिया ,भागवत के छाती पर मूंग दलकर। कामन सिविल की जगह मुश्लिम महिलाओं के लिये तीन तलाक का खेल खेलने लगे। मोदी चिल्ला कर बोलता है कि अंबेडकर नही होते तो मै पी एम नही बनता। कभी कहा कि सावरकर, गोलवलकर ,भागवत ने हमे पी एम बनाया।

अटल से ज्यादा मोदी और शाह संघ के लिये खतरनाक है। मोदी के काट के लिये दिग्विजय के उत्त्तराधिकारी को लाया गया। मोदी के प्रत्याशी को गोरखपुर मे जानकर हराया गया। कोल्ड वार जारी है मोदी और शाह का खेल बहुत लंबा नही चलेगा। बीजेपी चुनाव मे खुद संघ के द्वारा हरा दी जायेगी अगर मोदी पी एम के प्रत्याशी रहे तो। नही तो 2019 मे वे हटा दिये जायेंगे।

कल जो अडवानी थे आज मोदी को बनाया गया और आज जो अडवानी है कल बहुत ही जल्दी मोदी होने वाले हैं। संघी सत्ता से टकराव नही लेते और समय आने पर सत्ता की औकात भी बताते है। संघ मे प्रतिभाहीन, सरस्वतीविहीन, लगनशील लोग ही आगे बढ़ते है लेकिन मोदी ने संघ को दरकिनार किया है लेकिन बकरा की माँ कब तक खैर मनायेगी – डा बी एन सिंह


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