बिहार और पश्चिम बंगाल में दंगे, 2019 की तैयारी है – उर्मिलेश उर्मिल, वरिष्ठ पत्रकार

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बिहार और पश्चिम बंगाल में हो रहे दंगों पर  वरिष्ट पत्रकार उर्मिलेश  उर्मिल के अनुसार यह दंगे दरअसल 2019 में होने वाले आम चुनावों की तैयारी है उनका कहना है कि यद्यपि देश में फासीवादी ताकतें उफ़ान पर हैं, लेकिन साथ ही इस देश की धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील जनता का इन ताकतों के खिलाफ़ प्रतिरोध भी उतना ही मज़बूत है.

बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्य पिछले एक हफ्ते से हिंसा की चपेट में हैं। बिहार के औरंगाबाद में रामनवमी के दिन जुलूस को लेकर हिंसा की शुरुआत हुई थी उसके बाद से एक एक करके कई जिले इसकी चपेट में आ गए हैं। आरा, सिवान, नवादा सहित कई जिलों में छोटी बड़ी हिंसा हुई। हैरानी की बात है कि पिछले दो साल से रामनवमी के मौके पर औरंगाबाद में हिंसा होती रही थी। पर सरकार ने ऐहतियात के तौर पर कोई कदम नहीं उठाया।

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इसी तरह पश्चिम बंगाल के आसनसोल और रानीगंज में हिंसा भड़की तो प्रशासन और पुलिस दोनों की कोई तैयारी नहीं दिखी। खबर है कि दंगों में ट्रक से भर कर हथियार पहुंचाए गए। तलवारों के साथ साथ पेट्रोल बम और बंदूकें आदि लोगों को दी गईं। बताया जा रहा है कि कोयला माफिया ने दंगों को हवा दी और लोगों को हथियार देकर उन्हें भड़काया। एक हफ्ते की हिंसा में चार लोग मारे जा चुके हैं।

दोनों जगह जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार मान रहे हैं कि ये दंगे अचानक नहीं थे। राजनीतिक मकसद से इन्हें भड़काया गया और इसके जरिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास किया जा रहा है। पिछले कुछ समय से अलग अलग मुद्दों पर ध्रुवीकरण का माहौल बनाया जा रहा है। अब विकास की बातें और सुशासन की चर्चा बंद हो गई है और उसकी जगह वोट के लिए ध्रुवीकरण के प्रयासों की ज्यादा चर्चा होने लगी है।

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