राफेल मे भृष्टाचार की कहानी, अंबानी, फिल्म और राफेल की जुबानी

  • 81
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

The Dailygraph Need Your Help  हमें आपकी मदद चाहिए

राफेल पर आज हम आपको बताते हैं भारतीय राजनीति में मोदी सरकार के गले की हड्डी बनी राफेल डील की वो कहानी जो गोदी मीडिया की टीवी स्क्रीन्स से पूरी तरह गायब है।

राफेल डील के उस भ्रष्टाचार की कहानी जिसमें, देश की सुरक्षा तक को ताक पर* रख दिया गया। राफेल की इस कहानी में *फिल्मी चमक-दमक है…एंटरटेनमेंट है…पैसा है…फ्रांस है…मोदी है और है- अनिल धीरूभाई अंबानी। आज हम इन्हीं आपसी गठजोड़ और लाभ की नींव पर टिके रिश्तों की गाँठे खोलने जा रहे हैं।

साल था 2016 का। भारत के गणतंत्र दिवस पर फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। यहाँ एंट्री होती है अनिल अंबानी की और वो रिलायंस एंटरटेनमेंट के जरिए फ्रांस के राष्ट्रपति की अभिनेत्री बीवी की फ्रेंच फ़िल्म में पैसा लगाने का फैसला लेते हैं…यह 24 जनवरी 2016 की घटना है। ठीक दो दिन बाद यानी 26 जनवरी को ओलांद और मोदी 36 राफेल विमानों की डील पर हस्ताक्षर करते हैं। देखने मे यह बहुत साधारण लग रहा है परन्तु है नहीं।

दरअसल, आपसी लेन-देन के इस खेल के तीन बिंदु है – मोदी, अंबानी और ओलांद। अम्बानी ओलांद की बीवी की फ़िल्म में पैसा लगाते हैं…मोदी को चुनाव में पैसा देते हैं और फिर मोदी-ओलांद मिलकर राफेल की डील अम्बानी की गोद में डाल देते हैं।

डील में विमान का मूल्य तीन गुना कर दिया जाता है…अरे भाई, अम्बानी ने जो पैसा लगाया था वो भी तो निकलना जरूरी था। अगर फ्रांस में ओलांद चुनाव नहीं हारते तो यह खबर कभी सामने नहीं आती।

मोदी सरकार से जुड़े आडवाणी खेमे के नेताओं ने बताया कि अब भारत को शायद ही राफेल विमान मिल पाए क्योंकि मेक्रोन राफेल डील में भ्रष्टाचार को गम्भीरता से ले रहे हैं और यही कारण है कि मोदी सरकार और फ्रांस के रिश्ते तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।

इसी बीच, इस डील के पैसों का समान रूप से बंटवारा न होने के कारण मोदी सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों, आरएसएस के प्रभावशाली लोगों के बीच अंदरूनी मन-मुटाव की खबरें भी आ रही है – मनोज सिंह द डेली ग्राफ

loading...
  •  
    81
    Shares
  • 81
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Related posts

Leave a Comment