मैं एक ब्राह्मणी हूँ। मेरा बेटा गे यानी समलैंगिक है। उसे एक पशु प्रेमी, शाकाहारी पार्टनर चाहिए।

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मैं एक ब्राह्मणी हूँ। मेरा बेटा गे यानी समलैंगिक है। उसे एक पशु प्रेमी, शाकाहारी पार्टनर चाहिए। पार्टनर ब्राह्मण हो और उसमें भी अय्यर ब्राह्मण तो बेहतर ! ये विज्ञापन मुंबई में छपा। द हिंदू और बीबीसी मे

आमतौर पर माना जाता है कि जाति व्यवस्था रक्त शुद्धता को बनाए रखने की व्यवस्था है ताकि सब लोग एक से न हो जाएँ। ऊँच और नीच बने रहें। अपनी जाति में शादी का यही मतलब है ताकि संतान में अपनी जाति का ही ख़ून हो।

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बाबा साहेब ने अपनी पहली थीसिस कास्टस इन इंडिया में लिखा है कि जातियाँ ब्राह्मणों ने बनाई है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें ब्राह्मण ने स्थायी तौर पर ख़ुद को सबसे ऊपर रख लिया है।

संतान की रक्त शुद्धता के लिए शादी में जाति खोजने के तर्क हैं। हालाँकि है ये बकवास।

लेकिन मिस्टर अय्यर और मिस्टर अय्यर मिलकर बच्चा तो पैदा करेंगे नहीं।

तो माँ पद्मा अय्यर को बेटे हरीश अय्यर के लिए मिस्टर अय्यर ही क्यों चाहिए ?

बाबा साहेब ने एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट में इनको बीमार कहकर इनकी सही पहचान की थी।

समस्या यह है कि ये ख़ुद बीमार हैं और दूसरों को भी इन्होंने बीमार कर दिया है – दिलीप मंडल

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