‘आप’ विधायक अलका लांबा को ट्वीटर पर नमो-आरएसएस समर्थक क्यों दे रहे हैं गंदी गंदी गालियां ?

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दिल्ली सरकार की आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने समलैंगिकता की धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने ट्वीटर एकाउंट से पोस्ट कर ट्रोल करने की कोशिश की तो नमो समर्थकों ने उनके पोस्ट को गंदी गंदी गालियों और अपशब्दों से भर दिया. किसी ने उनको सेक्स रैकेट चलाने का दोषी ठहरा दिया तो किसी ने ‘कुतिया’ और ‘बेवकूफ’ जैसे अपशब्द का प्रयोग किया.

दिल्ली के चांदनी चैक से आप विधायक अलका लांबा ने नमो समर्थकों को ‘भक्त’ नाम से संबोधित करते हुए ट्वीटर पर पोस्ट किया कि, ‘हटाने तो 370 आये थे, हटा 377 बैठे’, ‘बनाने को राम मंदिर आये थे, बना शाह का महल(दफ्तर) बैठे’, ‘बसाने तो कश्मीरी पंडितों को आये थे, खुद उजड़ बैठे’, ‘बचाने तो बेटियों की इज्ज़त आये थे, खुद ही बलात्कारी बन बैठे’.

विधायक अलका लांबा के इस पोस्ट के बाद नमो समर्थक उन पर टूट पड़े. सोशल मीडिया पर खुलेआम एक जनप्रतिनिधि पर गालियां बरसने लगी. गालियां देने वालों के ट्वीटर एकाउंट अब भी विजिबल हैं. यह इस बात का सबूत है कि लाख दावा करने के बाद भी इन सोशल मीडिया के संचालक खुलेआम किसी के लिए भी अमर्यादित शब्दों को प्रयोग करने वाले यूजर्स पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगा सकते.

नमो और आरएसएस समर्थक ‘प्रीत दीक्षित 99.9 फाॅलोबैक’ ने तो विधायक अलका लांबा के पोस्ट रिप्लाई में बकायदा एक फेक फोटो पोस्ट करते हुए उन्हें घर पर वैश्यावृत्ति का कारोबार चलाने का दोषी ठहरा दिया. जबकि सच्चाई यह कुछ और ही है.

इसी तरह नमो और आरएसएस समर्थक मुकेश दास ने एक महिला विधायक को ‘दो कौड़ी की अलका लांबा’ बोल कर सवाल किया. जनता द्वारा चुने गए एक जनप्रतिनिधि के खिलाफ सोशल मीडिया पर इस प्रकार के अभद्र शब्दों का बेखौफ होकर प्रयोग करने वाले यूज़र्स के खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही का न होना यह दर्शाता है कि, सभी सोशल मीडिया नेटवर्किंट साइट के संचालकों का इन जैसों पर लगाम कसने का दावा महज़ एक ढकोसला ही है.

सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताने पर जब इस प्रकार किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति को नमो-आरएसएस समर्थक सोशल मीडिया पर खुलेआम गालियां दे सकते हैं तो ज़रा सोचिये कि आम आदमी के लिए ये किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करते होंगे?

बता दें कि, 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया नेटवर्क पर हेट स्पीच से लेकर गालियां देने प्रचलन तेजी से बढ़ा है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी की भारी जीत के पीछे सोशल मीडिया को भी श्रेय दिया गया. दरअसल, बीजेपी ने करोड़ों रूपये खर्च कर सोशल मीडिया पर जमकर प्रचार के लिए आईटी सेल बनाई जिसने मोदी की जीत को अमलीजामा पहनाया. आज जब सोशल मीडिया पर स्थिति इतनी बेकाबू हो चुकी है कि हेट स्पीच, फेक पोस्ट करने वालों ने अनियंत्रित होकर पूरे देश में अफवाह, दंगा, फसाद फैलाना शुरू कर दिया. ऐसे लोगों पर लगाम कसने के लिए उन सभी सोशल मीडिया नेटवर्क के संचालकों को चेतावनी दी गई. लेकिन हालात अब भी वही हैं और लगातार बिगड़ने की कगार पर हैं.

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