चार साल से मोदी सिर्फ रंगबिरंगे कपड़े पहनकर नगाड़ा और बांसुरी बजा रहे हैं, उपलब्धि तो शून्य है

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चार साल से मोदी विदेश जाकर रंगबिरंगे कपड़े पहनकर नगाड़ा और बांसुरी बजा रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेश कितना लाए ?

विदेशों में मोदी जी का डंका बजता है। इसे साबित करने के लिए उन्होंने कई देशों में बांसुरी और नगाड़े बजाए। विदेश में रह रहे भारतीयों से नारे लगवाए। बराक भाई के साथ फोटो खिंचवाई और जिनपिंग के साथ हिंडोला झूले। प्रधानमंत्री बनने के ​बाद उन्होंने कहा कि हम विदेश नीति को एकदम अलग दिशा में ले जाएंगे। लेकिन जब एक साल बीता तो कभी मोदी के प्रशंसक रहे वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक का हमने एक इंटरव्यू लिया। उनका कहना था कि शोर बहुत था, लेकिन मोदी जी का सारा शोर मोर का नाच साबित हुआ है। भाजपा और नरेंद्र मोदी विदेशी मोर्चे पर बुरी तरह फेल हो चुके हैं।

सबसे बड़ा मुद्दा पाकिस्तान था लेकिन पाकिस्तान को न आप घेर सके, न कोई दबाव बना सके, न ही बातचीत शुरू कर सके। पांच साल कनफ्यूज रहे कि उसे दुश्मन मानें या दोस्त बनाएं। बस नारों में और भाषणों में पाकिस्तान जिंदा रहा। आईएसआई को बुलाकर पठानकोट हमले की जांच जरूर करवा ली। जम्मू कश्मीर में हालात और ही खराब हुए। जो मिलिटेंसी लगभग शांत थी, वह फिर से उभरी।

अमेरिका से हालिया समझौता भारत की संप्रभुता पर चोट है जिसके तहत अमेरिका आपको निर्देश दे रहा है कि आप ईरान से तेल लेना बंद करें वरना हम प्रतिबंध लगा देंगे। वह आपको रूस से हथियार खरीदने में बाधा खड़ी कर रहा।

अमेरिका पर सब कुछ लुटा देने वाली मुद्रा में भी आप न तो एनएसजी के सदस्य बन सके, न पाकिस्तान से आतंकी ला पाए। न माल्या आया, न मेहुल भाई आए। मालदीव में चीन ने अपना अड्डा जमा लिया। बांग्लादेश से भी आपका कुछ खास रिश्ता नहीं है। जबकि चीन वहां पर दक्षिणी और उत्तरी बांग्लादेश को जोड़ने वाला पुल बना रहा है। बांग्लादेश ने अपना ढाका स्टॉक एक्सचेंज का 25 फीसदी हिस्सा चीन को बेच दिया जबकि भारत के अधिकारी वहां गए थे, नाकाम होकर लौट आए।

नेपाल जो करीब करीब भारतीय ही है, जिसकी हमारी सीमाएं खुली हैं, वहां जाकर शेखी बघारकर लोगों को नाराज किया, नाकेबंदी करके और वहां हिंदू राष्ट्र का अभियान चलाकर अपनी ही जड़ खोद ली। उस नाकेबंदी से कोई फायदा नहीं हुआ, सिवाय नेपाल चीन की नजदीकी बढ़ने के। श्रीलंका ने अपना हम्बनटोटा पोर्ट चीन के सुपुर्द कर दिया। नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश हर देश में चीन मजबूत हुआ।

विदेश नीति विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी की मानें तो ‘डोकलाम में चीन ने रणनीतिक स्तर पर जीत हासिल की है। चीन विवादित इलाक़े में निर्माण कार्य कर रहा है। इसके चलते भूटान अपनी सुरक्षा को लेकर भारत पर भरोसा करने से पहले सौ बार सोचेगा। दक्षिण एशिया और इसके क़रीब के देशों से भारत दूर हुआ है। नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान में भारत की स्थिति कमज़ोर हुई है। ऐसा भारत की दूरदर्शिता में अभाव के कारण हुआ है। शुरू में मोदी ने मज़बूत शुरुआत की थी, लेकिन आगे चलकर चीज़ें नाकाम रहीं।’

मेक इन ​इंडिया का नारा लगाते रहे लेकिन यह केवल मोदी जी और भगवान राम ही जानते हैं कि कितना विदेशी निवेश ला पाए। फिर इतने देशों में आप घूमे किसलिए ? रंगबिरंगे कपड़े पहनकर नगाड़ा और बांसुरी बजाने के लिए ? स्पष्ट है कि विदेश नीति के साथ नोटबंदी कांड हो गया – कृष्णकांत

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