रवीश कुमार ने क्यों कहा कि, ‘आप एक दिन मानव बम बन जायेंगे, जो कहीं भी फट जायेगा’

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एक पब्लिक मीटिंग में एनडीटीवी के स्टार एंकर और मशहूर टीवी पत्रकार रवीश ने मंच से कहा कि एक दिन हम सब मानव बम बन जाएंगे, जो कहीं भी फट जायेगा. उनका आशय हिन्दुस्तान के नागरिकों के अंदर तेजी से फैल रही धार्मिक हिंसा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार बनने के बाद देश में अच्छे दिन और विकास को ढूंढ पाना मुश्किल है लेकिन धार्मिक हिंसा हर कहीं मिल जायेगी. गोहत्या, राममंदिर, लव जिहाद, घर वापसी जैसे ऐसे सैकड़ों ज्वलनशील मुद्दे हैं जो देश को बांट रहे हैं. कमाल की बात यह है कि यह सभी मुद्दे या तो सत्तासीन पार्टी के हैं या फिर इनको समर्थन देने वाले कट्टरपंथी संगठनों के हैं.

रवीश कुमार की दी गई चेतावनी की तुलना अगर हम इंटरनेशनल स्तर के पेव रिसर्च सेंटर की 198 देशों में हो रही धार्मिक हिंसा पर आधारित रिपोर्ट से करें तो हम देखेंगे कि, पिछले चार सालों में भारत धार्मिक हिंसा में चौथे पावदान तक पहुंच चुका है. वहीं, पहले तीन देश सीरिया, नाइजीरिया और ईराक हैं जहां के हालात से पूरी दुनिया वाकिफ है. भारत की यह तरक्की केंद्र में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार के बाद हुई है.

pew research 2018

इसी तरह साल 2007 से लेकर 2016 तक दुनिया के 25 ऐसे देशों में हिन्दुस्तान शामिल हो गया है जहां पर सबसे ज्यादा सामाजिक शत्रुताएं बढ़ी हैं. वहीं, पड़ोसी देश चीन में धार्मिक प्रतिबंध बढ़ा है. चौंकाने वाली बात यह है कि, हमारे एक और पड़ोसी देश पाकिस्तान में न तो सामाजिक शत्रुता और न ही धार्मिक प्रतिबंध बढ़ा है. जबकि हिन्दुस्तान के नागरिकों को यहां के नेता अक्सर यह समझाते रहते हैं कि, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं. बता दें कि इसी साल आई वर्ल्ड हेप्पीनेस की ताज़ा रिपोर्ट ने भी यह साफ कर दिया है कि, पाकिस्तान की जनता भारत की जनता से काफी खुशहाल जीवन बिता रही है.

एक और रिपोर्ट का ज़िक्र यहां बहुत ही महत्वपूर्ण है जो देश के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारिता से जुड़ा है. बता दें कि, रिपोर्टर्स विदआउट बाॅर्डर्स की इस साल की रिपोर्ट में भी भारत के अंदर प्रेस की आज़ादी को हथकड़ी लगी है. दुनिया के 180 देशों में भारत साल 2016 में 133, साल 2017 में 136 और साल 2018 में 138 नंबर पर लगातार बढ़ता जा रहा है. इस रिपोर्ट से साल है कि, केंद्र की मोदी सरकार में प्रेस की आज़ादी लगातार घटती जा रही है.

जितने भी आंकड़े ऊपर दिये गये हैं, यह केवल भारत देश की तेजी से बदलती तस्वीर का एक छोटा सा उदाहरण है. ऐसी सैकड़ों रिपोर्ट हैं जो रोजगार, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत को दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अति पिछड़ा बनाती है. देश के नागरिकों के अंदर भी इन सभी बातों को लेकर काफी नाराज़गी भी है. उनकी नाराज़गी को बड़ी ही आसानी से यहां के नेता किसी खास समुदाय या जाति से नफरत करने की दिशा में मोड़ देते हैं और वोट पा जाते हैं. लोगों को अंदाज़ा भी नहीं है कि, आने वाले दिनों में उनकी हालत क्या होने वाली है.

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