सारी ईवीएम मशीने एंड्रॉइड फोन से कनेक्ट हो रही है, इसका मतलब बीजेपी जीत चुकी है !

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चुनाव आयोग की EVM मशीन को हम किसी भी एंड्रॉइड मोबाइल के जरिए कनेक्ट कर सकते है।

आप कहेंगे कि यह तो सम्भव ही नही है क्योंकि ईवीएम या VVPAT में किसी तरह से इंटरनेट कनेक्ट ही नही किया जाता, ईवीएम को कोई भी व्यक्ति हैक नहीं कर सकता, क्योंकि ईवीएम में किसी भी तरह की सिम, नेटवर्क, रिमोट, ब्लूटूथ, इंटरनेट नहीं होता, जिसे हैक या उससे छेड़छाड़ की जा सके।EVM तो पूरी तरह से पवित्र है उसमें छेड़छाड़ की कोई संभावना ही नही है और यही हमे हमेशा बताया भी गया है।

लेकिन यह पूरी तरह से झूठ है सच यह है कि जो नयी पुरानी मशीनें चुनाव आयोग इस्तेमाल में ला रहा है उन मशीनों में खुद चुनाव आयोग ने एक ट्रेकिंग डिवाइस/सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया है जिसे चुनाव आयोग EVM/VVPAT की ट्रेकिंग में इस्तेमाल में ले रहा है।

ओर यह घोषणा स्वयं चुनाव आयोग ने अपने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ओर VVPAT के जुलाई 2018 के मैन्युअल में की है इस मैन्युअल का अध्याय 19 पूरा का पूरा EVM ट्रेकिंग सॉफ्टवेयर को समर्पित हैं इसका पता तब लगा जब कल जबलपुर के मित्र अमिताभ जायसवाल जी ने यह चौकाने वाली जानकारी शेयर की ओर 19 वे अध्याय का अमिताभ जी ने बड़े जतन से हिंदी अनुवाद भी किया इस अध्याय के शुरुआत में ही बता दिया गया हैं कि’ ईवीएम ट्रैकिंग एंट्री एप्लिकेशन सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का केंद्रीकृत डेटाबेस बनाने के लिए विकसित किया गया है । यह कंट्रोल यूनिट, बैलेटिंग इकाइयों और वीवीपीएटी के ट्रैकिंग की सुविधा देता है इस एप्लीकेशन के ज़रिये वेयरहाउस इंचार्ज द्वारा सेंट्रल यूनिट, बैलट यूनिट और वीवीपीएटी के वेयरहाउस डिटेल्स की एंट्री की जा सकती है।

इस अध्याय के आखिरी दो पैरा मोबाइल एप्लीकेशन से संबंधित है जिसमें बताया गया है कि आयोग द्वारा स्टॉक-टेकिंग, एफएलसी शिफ्टिंग और Randomiztion के लिए ईटीएस के साथ इंटरफेस आधारित एंड्रॉइड आधारित मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है. ये मोबाइल एप्लीकेशन evm और vvpat का डाटा कैप्चर करने के लिए ऑफ लाइन मोड में काम कर सकते है ताकि उसे evm ट्रैकिंग सॉफ्टवेर में अपलोड किया जा सके। ये मोबाइल एप्लिकेशन ऑफ़लाइन काम कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें लॉगिन करने के लिए नेट-कनेक्टिविटी (वाई-फाई या डेटा कनेक्शन) की आवश्यकता है।

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अब शायद आपके दिमाग की बत्ती जले कि क्यो ओर कैसे गुजरात के पिछले विधानसभा चुनाव में एक शिकायतकर्ता ने जब बूथ के बाहर मोबाइल फोन में जब ब्लूटूथ ऑन किया तो उसे ‘ईसीओ 105’ के रूप में एक अन्य उपकरण उपलब्ध मिल गया ओर उसे यह ‘आशंका हुई कि ‘ईसीओ 105’ मतदान केंद्र में लगी ईवीएम ही है यह मामला उस वक़्त भी चर्चा का केंद्र बना था।

आपको अब लग रहा होगा कि ईवीएम के परिणामो को रिमोट से प्रभावित नही किया जा सकता लेकिन कुछ महीनों पहले अमेरिका से आई एक रिपोर्ट बताती है कि यह धारणा भी झूठी है अमेरिका में 2000 से 2006 के बीच वोटिंग मशीन बनाने वाली नंबर-1 कंपनी इलेक्शन सिस्टम एंड सॉफ्टवेयर (ES&S) ने माना कि उसके द्वारा बेची गईं कुछ वोटिंग मशीनों में रिमोट टूल इंस्टॉल किए गए थे, अमेरिकी सेनेटर रॉन वाइडेन को भेजे गए एक लेटर में वोटिंग सिस्टम वेंडर ES&S ने कहा है कि 2000-2006 में लोकल सरकार को हैंडफुल मशीनें बेची गई थीं. कंपनी द्वारा सेनेटर को भेजे गए लेटर के मुताबिक 6 साल तक वोटिंग मशीन में रिमोट ऐक्सेस सॉफ्टवेयर था कुछ कस्टमर्स को ऐसे pcAnywhere नाम के रिमोट कनेक्शन सॉफ्टवेयर दिए गए।

यानी कि साफ है कि ईवीएम मशीन में कुछ सॉफ्टवेयर के द्वारा परिणामो को प्रभावित करने की बात झूठी तो बिल्कुल नही है और 2019 के चुनावों में पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनाव आयोग ने मतदान केन्द्र के 100 मीटर के दायरे में मोबाइल पर प्रतिबंध लगाया है यह बात भी ध्यान देने योग्य हैं कि यदि ईवीएम में छेड़छाड़ होना संभव ही नही है तो इस तरह के प्रतिबंध लगाने का अर्थ ही क्या निकलता है।

दरअसल सच तो यह है कि हर मशीन को हैक किये जाना संभव है लेकिन EVM तो पवित्र वस्तु है यही राग अलापते रहना है तो कोई क्या कर सकता है।

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