पुरुष औरत को सेक्स पूर्ति की वस्तु समझता है फिर चाहे वह पत्नी हो गर्लफ्रेंड हो या बाजार से खरीदा हुआ जिस्म

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हमारे भारतीय समाज में पुरुष औरत को सेक्स पूर्ति की वस्तु समझता है फिर चाहे वह पत्नी हो…गर्लफ्रेंड हो या बाजार से खरीदा हुआ जिस्म हो। शरीर में सिर्फ टांगों के बीच की जहग ही मायने रखती है, अधिकतर लोगों के लिए।

यूं तो विवाह दो जिस्मों के मिलन के साथ साथ दो आत्माओं का मिलन भी कहा जाता है…पर, यकीन मानिए सिर्फ कहा ही जाता है…होता नहीं है ऐसा।

क्योंकि पुरुष द्वारा पत्नी पर खुद को थोप दिया जाता है।
मैं यह नहीं कहती कि सेक्स की आवश्यकता औरत तो नहीं होती… उसे भी होती है, लेकिन वह बहुत ज्यादा डिवोटेड होती है पुरुष की अपेक्षा। यदि पुरुष की इच्छा नहीं है तो पत्नी उसे बाध्य ही नहीं कर सकती कि उसके साथ सेक्स करें। लेकिन, अगर पुरुष की इच्छा है और पत्नी की नहीं…तो वह अपनी नाराज़गी जता देगा या तो अपने व्यवहार से…या फिर अपनी आंखों से…या फिर अपने शब्दों से उसे चोट पहुंचाएगा।

जिसके चलते पत्नी उस स्थिति से बचने के लिए स्वयं को मर्जी ना होते हुए भी सौंप देती है…जबकि….एक वेश्या अपना नाड़ा अपनी शर्तों पर खोलने देती है…जिसको आप पैसे देकर समय लेते है…1 घंटे- 2 घंटे या पूरी रात…अपनी औकात के हिसाब से। वह अपना जिस्म कुछ शर्तों पर ही आप को सौंपती है। जैसे :-

1. वह पहले डिसाइड करवा लेती है कि उसे क्या-क्या करना मंजूर है और क्या क्या नहीं ।
2. आपके लिंग को मुंह में लेगी या नहीं
3. आपके वीर्य को अपने मुंह में लेगी या नहीं या आप उसके शरीर में अपने वीर्य का छिड़काव कर पाएंगे या नहीं ।
4. क्या गुदामैथुन की इजाजत है या नहीं।

लेकिन पत्नी के साथ ऐसा कुछ नहीं…वह आंखें बंद किए हुए…एक सांस लेती हुई लाश की तरह से पड़ी रहती है और आप उसके ऊपर चढ़ाई कर देते हैं। इधर से मोड़ा, उधर से मोड़ा और शुरू हो गए। पत्नी मन ही मन कसमसाती रहती हैं…आँखें भींच कर इस कार्यक्रम के खत्म होने का बेसब्री से इंतजार करती है। लेकिन मन ही मन वह बहुत आहत है, दुखी है, परेशान है। क्योंकि उसके दिमाग में कहीं न कहीं चल रहा होता है कि काश !! मुझे भी ढंग का पति मिला होता…अर्थात आप इस समय उसके पति नहीं…आप उसके शरीर के उपभोक्ता मात्र है…वह भी फ्री वाले।

जबकि वेश्या के साथ आप अगर जरा सा भी उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ करते हैं तो वह तपाक से आपके मुंह में बोलती है… कमीने टांग तोड़ेगा क्या ??  टांगे उठा कर सिर पर रखना है क्या चूतिए ?? फैला कर खुद भी घुसेगा क्या ?? तमीज से कर, क्या मुंह से निकाल देगा !! इतने झटके क्यों लगा रहा है ??? हरामखोर चदवाने के पैसे दे रहा है फाड़ने के नहीं वेश्या के साथ यह कार्यक्रम यदि 1 घंटे के लिए तय हुआ है तो 1 घंटे से 1 मिनट भी वह आपको अपने पास नहीं रहने देगी और हां दो बार का एक्स्ट्रा पैसा छाती पर चढ़ कर ले लेती है।

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वह अलग बात है कि कभी कभी आपका शेर जब चूहा बन कर लटक रहा होता है तब यही वेश्या आप का मखौल उड़ाने में भी नहीं चूकती…..अबे साले !! यह मरा हुआ चूहा लटका कर काहे आए हो ? मेरा समय खोटी करने के लिए ? जगा कर लाया कर इस को जगाने के पैसे अलग से लगेंगे समझे।

लेकिन पत्नी के साथ ऐसा नहीं होता है…आप पत्नी को रात में ही पटकते हैं और सुबह नींद में ही उसको पीछे से घुमा के फिर से शुरू हो जाते हैं….वह आधी नींद में आधी जागी…अनिच्छा से आप को फिर से बर्दाश्त करती है। फिर पुरुषों में एक और भी बड़ी गंदी आदत होती है वह यह कि तुरंत तुलना कर देंगे… किसी खूबसूरत और पतली कमर वाली हीरोइन से अपनी बीवी की ….भैया मेरे !!!!

वह तुम्हारे बच्चों की मां है….उसने अपने शरीर को झोला बनाया है तब जाकर तुमने बाप होने का सुख पाया है। दिन भर काम करती है…अपनी सुध नहीं रखती हैं तो शरीर कहां बचेगा ? क्या शादी करते समय वह इतनी ही फैली हुई थी जितनी आज है ?  फिर क्यों कोंचते रहते हो उसको बेवजह ? तुम्हें अपनी बड़ी हुई तोंद तो नहीं दिखेगी मगर उसके पेट पर बढ़ी हुई चर्बी जरूर देखेगी।

सबसे अधिक परेशान करने वाला कृत्य जो एक पुरुष अपनी पत्नी के साथ करता है वह यह की अपनी भूख (जी हां भूख ही कहूंगी) मिटा लेने के बाद पिछवाड़ा घुमा कर सो जाता है…क्योंकि उसके लिए उस शरीर की भूख सिर्फ उसी समय तक ही थी जबतक उसके शरीर की अंदर कि वह गर्मी सफेद द्रव्य के रूप में बाहर निकल नहीं जाता…उसके बाद तो उसी शरीर से वितृष्णा हो जाती है और वह पीठ दिखाकर खर्राटे भरने लगता है ।

अगर तुमने उसकी मर्जी के बगैर किया है या मर्जी के साथ भी किया है तो भी उसकी तरफ पीठ क्यों ? उसको अपने साथ लेकर सो सकते हैं…उसके शरीर में हाथ फेर सकते हैं…उसके बालों को सहला सकते हैं। उसे पूछ सकते हैं…तुम्हें लगा तो नहीं ?

क्योंकि एक औरत के लिए सिर्फ लिंग का योनि में घुसना ही प्यार नहीं है…प्यार से बोले हुए शब्द और प्यार से शरीर पर फेरा गया हाथ शारीरिक संबंधों को मजबूती देते हैं।

अन्यथा…ज्यादा फर्क नहीं रह जाता …उसके दिमाग में भी यही बात आती है कि मैं भी किसी वेश्या के जैसी हूँ…लेकिन सिर्फ एक कस्टमर की…जो मुझे अपने हिसाब से इस्तेमाल करता है और बदले में मुझे रहने के लिए घर…चलने के लिए गाड़ी…पहनने के लिए कपड़े और ज़ेवर और एक, दो या तीन बच्चों की जिम्मेदारी देगा।

जबकि एक वेश्या 1 घंटे के इसी काम के पैसे लेती है और अपने हिसाब से जीती है। मैं यह नहीं कहती कि वेश्या का जीवन एक शादीशुदा औरत से अधिक अच्छा है…लेकिन यदि आपकी पत्नी में यह तुलनात्मक विचार आता है तो यकीनन आप एक ऐसे पुरुष हैं जिसके पास सिर्फ लिंग है और पत्नी के नाम पर उसके पास एक शरीर जिसके पास योनि और वक्ष हैं।

आपको सावधान होने की जरूरत है क्योंकि अब तो कोर्ट ने धारा 497 को मान्य कर दिया है – डा मोनिका जौहरी

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