मोदी को चुनाव मे जहाज देने वाले अडाणी के खिलाफ़ कोई जानकारी नहीं दी जायेगी

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आपको याद होगा 2014 के लोकसभा चुनाव में गौतम अडानी ने मोदी को एक चार्टर प्लेन दिया था तब उनकी कंपनी कर्जे में डूबी थी। मोदी के पीएम बनते ही गौतम अडानी की कंपनी रातो रात कर्जे से बाहर आ गयी और सारे देश मे सबसे बङे टेंडर उनको मोदी ने दिला दिये। आज अडानी की कंपनी मोदी सरकार की मेहरबानी से एक लाख करोङ से ज्यादा के फायदे मे आ गयी है।

ऐसा लगया है कि मोदी जी ने अरबपतियों के लिए देश में अलग कानून हैं वो RTI के दायरे में नहीं आते है। एक गरीब किसान जब लोन नहीं चुका पाता तो रिकवरी के लिए गुंडों से धमकाया जाता है, सारे मोहल्ले में हल्ला करके उसको बेइज्जत किया जाता है! मगर अदानी पर ये लागू नहीं होता।

केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा है कि उद्योगपति गौतम अडाणी की कंपनियों को दिए गए कर्ज से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं, क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने संबंधित सूचनाओं को अमानत के तौर पर रखा है और इससे वाणिज्यिक भरोसा जुड़ा है।

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सीआईसी ने यह आदेश रमेश रणछोड़दास जोशी की याचिका पर दिया। जोशी एसबीआई से जानना चाहते थे कि गौतम अडाणी समूह को किस आधार पर बड़ी मात्रा में कर्ज दिए गए। उन्होंने इस बारे में साक्ष्य भी मांगे थे कि क्या कर्ज आस्ट्रेलिया में कोयला खानों से संबंधित था।

सूचना आयुक्त मंजुला पराशर ने अपने आदेश में कहा कि सीपीआईओ अपीलकर्ता को सूचित करता है कि मांगी गई सूचना वाणिज्यिक है और तीसरे पक्ष के भरोसे के आधार पर इसे रखा गया है। इसीलिए इसे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और आरटीआई कानून की धारा आठ (1)(डी) (वाणिज्यिक विश्वास) और (ई) (अमानत) के तौर पर पड़ी चीज संबंधी प्रावधान के तहत सूचना देने से इनकार किया जाता है।

सुनवाई के दौरान एसबीआई ने दावा किया था कि जोशी ने गौतम अडाणी समूह के बारे में जानकारी मांगी थी। एसबीआई के केंद्रीय जन-सूचना अधिकारी ने दावा किया कि जोशी ने अपने आरटीआई आवेदन में यह जिक्र नहीं किया है कि यह मामला किस स्तर तक बड़े जन हित से जुड़ा हुआ है।

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